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2017 के खास आविष्कार

दोस्तों !  देखते ही देखते साल 2017 भी बीत गया. लेकिन यूं ही नहीं,  इस साल वैज्ञानिकों ने हमें बहुत कुछ दिया है. कई नये आविष्कार भी हुए हैं. आइए जानते हैं इस साल वैज्ञानिकों ने क्या-क्या नये आविष्कार किए हैं.

सात नये ग्रह की खोज– इस साल खगोल विज्ञानियों ने एक दो नहीं बल्कि 7 ऐसे ग्रहों का पता लगाया जो हमारे सौर मंडल के बाहर मौजूद हैं. ये सारे ग्रह एक छोटे तारे ट्रेपिस्ट के चारों ओर वृत्ताकार में स्थित है. सोलर सिस्टम से इनकी दूरी 40 प्रकाश वर्ष है. इनमें से 3 प्लैनेट ऐसे हैं, जिन पर जीवन की संभावना है, ऐसा नासा का मानना है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां पानी होने की भी संभावना है.

तीखा चिल्लाने वाली झींगा मछली – पनामा के पैसिफिक कोस्ट पर वैज्ञानिकों ने पिस्टल श्रिम्प (झींगा मछली) की एक नई प्रजाति का पता लगाया है, जो अपने गुलाबी रंग के पंजों को उठाकर इतनी तीखी आवाज करता है कि छोटी मछलियां भय से बेहोश हो जाती या मर जाती हैं, श्रिम्प के पंजों से निकाली गई यह आवाज 210 डेसीबल तक हो सकती है, जबकि किसी लाउड कंसर्ट में भी ध्वनि का स्तर 110 से 140 डेसीबल तक ही रहता है. वैज्ञानिकों ने इस श्रिम्प का नामकरण एक पॉपुलर रॉक बैंड पिंक फ्लॉयड के नाम पर सिनालफेयस पिंक फ्लॉयडी रख दिय़ा है.

एजिंग रिवर्स करने वाली थेरेपी – जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारी डैड सेल्स टीशूज में जगह बनाती चली जाती है, इससे उम्र बढ़ने संबंधी यानी एज रिलेटेड डिजीज होने लगते हैं. नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए एक प्रयोग में नए तरह के मॉलीक्यूल्स का इस्तेमाल किया. वैज्ञानिकों ने बुजुर्ग चूहों पर परीक्षण किया तो देखा कि उनके झड़े हुए फऱ दोबारा उगने लगे और किडनी की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त हो गई. इस ट्रायल के बाद बूढ़े चूहे पहले से दो गुना गति से भागने लगे. इस प्रयोग की सफलता के बाद वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि एजिंग को रिवर्स करने की दिशा में वे जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा पाएंगे.

बर्न पेशेंट पर स्प्रे स्किन का चमत्कार – बायोमेडिकल वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो जले हुए मरीजों के घावों पर स्टेम सैल्स स्प्रे कर सकता है. इससे मात्र 4 दिनों के अंदर स्किन की एक नई परत उग आती है. बायोटेक फर्म रेनोवा केयर ने हाल ही इस स्किन गन का पेटेंट हासिल किया है. फर्म ने कई बर्न पेशेंट्स का सफलतापूर्वक इलाज भी किया. फिलहाल यह डिवाइस फूड एंड ड्रग्स ऑथोरिटी के अप्रूवल का इंतजार कर रहा है. एक बार यह मार्केट में आ जाए, तो बर्न पेशेंट्स को दर्द भरे स्किन ग्राफ्टिंग प्रोसेस से छुटकारा मिल जाएगा.

मकड़ी के विष से स्ट्रोक डैमेज की रोकथाम – आस्ट्रेलिया की विषैली मकड़ी फनेल-बेब स्पाइडर अगर किसी को काट ले और उसका तुरंत इलाज न किया जाए, तो व्यक्ति 15 मिनट के अंदर मर सकता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति की एक मकड़ी के जहर में पाए जाने वाने केमिकल से स्ट्रोक से ब्रेन सैल्स की सुरक्षा का उपाय ढूंढ लिया है. स्ट्रोक के मरीज को आठ घंटे बाद भी इस रसायन से बनी दवा दी जाए, तो उसकी ब्रेन सेल्स सुरक्षित रह सकती हैं. यह प्रयोग व्यापक रुप से सफल रहा तो स्ट्रोक से मस्तिष्क को पहुंचने वाली क्षति का इलाज करने वाली यह पहली दवाई होगी.

कैंसर का खात्मा करने वाली लिविंग ड्रग – जल्दी ही कैंसर का इलाज करने वाली एक कारगर दवा उपलब्ध हो जाएगी. यह इम्यूनोथेरेपी ड्रग मरीज के ब्लड सेल्स को ही कैंसर किलर के रुप में तब्दील कर देती है. क्लिनिकल ट्रायल में लिम्फोमा के मरीज पर इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. इन मरीजों पर सारा परम्परागत इलाज फेल हो चुका था, तब इस इम्यूनोथेरेपी का प्रयोग किया गया. तीन महीनों बाद 37 फीसदी मरीजों में कैंसर का नामोनिशान मिट चुका था. हेल्थ एक्सपर्ट कैंसर ट्रीटमेंट के मामले में इसे एक बड़ा कदम मान रहे हैं.

भ्रूण में डीएनए की रिपेयरिंग – कई बार कुछ जन्मजात बीमारियां होती हैं, जिनका इलाज तमाम कोशिशों के बाद भी संभव नहीं होता. चीनी वैज्ञानिकों ने एक जीन एडिटिंग टूल का आविष्कार किया है, जो भ्रूण से रोग उत्पन्न करने वाले म्यूटेशन को काट-छांटकर निकाल सकता है. यह पहली तकनीकी टूल है, जिसमें मानव भ्रूण से बीमारी के दोष निकालकर गंभीर आनुवांशिक बीमारियों से उसे मुक्त किया जा सकता है. फिलहाल वैज्ञानिकों में इस टूल के प्रयोग को लेकर नैतिकता संबंधी बहस चल रही है.

मिला आठवां महाद्वीप– अभी तक सात महादेशों का अस्तित्व ही हम सबकी जानकारी में है. लेकिन इस साल भू वैज्ञानिकों ने न्यूजीलैंड के नीचे स्थित दक्षिण- पश्चिम पैसिफिक में एक नया महाद्वीप खोज लिया, जिसका नाम उन्होंने जीलैंडिया रखा है. हालांकि यह महाद्वीप 94 फीसदी पानी के भीतर है, लेकिन भू वैज्ञानिकों का कहना है कि यह उन सारे मानकों का पूरा करता है, जो इसे धरती के आठवें महाद्वीप की पहचान देता है. देखना यह है कि आने वाले दिनों में भूगोल की किताबों में जीलैंडिया को जगह मिलती हैं या नहीं.

ड्रैगन के खून से इंफेक्शन का इलाज – चिकित्सा विज्ञानियों ने दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली कोमोडो ड्रैगन्स के रक्त में एक ऐसा कंपाउंड खोज निकाला है, जो एंटीमाइक्रोबियल है. प्रयोगशाला में ट्रायल के दौरान वैज्ञानिकों ने एक चूहे के घाव पर मौजूद तत्व का इस्तेमाल किया तो घाव बहुत तेजी से ठीक होने लगा. तुलनात्मक रुप से दूसरे उपायों से घाव ठीक होने में समय ज्यादा लगा. इस नए एंटी माइक्रोबियल से दवा बनी इसका इस्तेमाल करके डाक्टर एंटीबायोचिक रेजिस्टेंट घावों का इलाज आसानी से कर सकेंगे.

प्रीमैच्योर बेबी के लिए कृत्रिम कोख – प्रीमैच्योर बेबी की देखभाल शिशु रोग विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है.  अब वैज्ञानिकों ने कृत्रिम कोख बना ली हैं जिसमें समय पूर्व जन्मे नवजातों को सुरक्षित रखकर उनका शारीरिक विकास सही रुप से किया जा सकता है. दिखने में यह किसी बड़े प्लास्टिक बैग की तरह है, जिसमें सिंथेटिक एम्नियोटिक फ्लुइड भरा होता है।

 






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