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सौरभ नये-पुराने विज्ञानों का

सुमन सौरभ का यह अंक सहेज कर रखने योग्य है. इसमें आपको कई नये विज्ञानों, नई तकनीकी की रोमांचक बातें पता चलेगी. लेकिन हम चाहेंगे कि इस अंक को पढ़ते समय आप विज्ञान के नये पुराने की बात ना सोचें बल्कि नये आईडियाज पर फोकस करने की सोचें.

पुराने जमाने से हम सब कैमिस्ट्री पढ़ते आ रहे हैं. इस विज्ञान में आज भी नवीनता है, तरोताजगी है. पिछले कुछेक वर्षों में इस विज्ञान ने रसायनिक तत्वों की फेहरिस्त को अदभूत तरीके से बढ़ाकर आज परमाणु संख्या को 118 तक पहुंचा दिया. नई खबर यह है कि रसायनिक व भौतिकशास्त्री सभी मिलकर अब 119 परमाणु संख्या वाले एल्कली मेटल की तलाश में निकल भी चुके हैं और माना जा रहा है कि इस धातु की खोज करने वालों के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिल सकता है. कैमेस्ट्री की एक और मिसाल लें. क्या ईजिप्टवंशी अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. अहमद जवैल द्वारा खोजी फेम्टोकैमिस्ट्री का नाम आपने सुना है. इस क्षेत्र में उन रसायनिक प्रतिक्रियाओं के अध्ययन शामिल हैं जो कि फेम्टोसेकेंड यानी सेकेंड के लाखवें हिस्से के अंदर में हो जाती है.

हमारा फोकस विज्ञान के नाम पर नहीं, बल्कि नई तकनीक, नये विचार और नई संकल्पनाओं पर होना चाहिए. इसी सिलसिले में आईंस्टाईन से जुड़ा एक लतीफा याद आ गया. हुआ यों कि एक बार आईंस्टाईन को ग्रेजुएट छात्रों के लिए फिजिक्स परीक्षा का एक पेपर सेट करना था. उन्होंने अपने सेक्रेटरी से कहा कि इस परीक्षा का एक पुराना पेपर ला दें ताकि उन्हें आईडिया हो जाए कि इस पेपर की रुपरेखा कैसी है. सेक्रेटरी ने उन्हें दस साल पुराना पेपर लाकर दे दिया. इसके बाद आईंस्टाईन इस बारे में भूल गए तो परीक्षा के दिन सेक्रेटरी ने वही पुराना परीक्षापत्र छात्रों को बांट दिया. परीक्षा के बाद जब कुछ छात्रों ने इस बारे में आईंस्टाईन से शिकायत करने पहुंचे तो आईंस्टाईन का जवाब यह था, पुराना प्रश्नपत्र मैंने जानबूझकर बंटवाया. क्या आज दस साल बाद हम उन प्रश्नों के वही जवाब देंगे जो दस साल पहले दिए थे. विज्ञान में स्थिरता व जड़ता नाम की कोई चीज नहीं, हमारे विचारों में नवीन झोंके रोज आते हैं. यही मैं आपके उत्तर में देखना चाहता हूं. जवाब सुनकर छात्र संतुष्ट होकर वहां से चले गए. कई वैज्ञानिक आज फेम्टोकैमिस्ट्री, ग्रीन कैमिस्ट्री और न्यूक्लियर कैमिस्ट्री को अपने आप में एक संपूर्ण विषय मानते हैं. ज्योमेट्री की शुरुआत ईजिप्ट में नील नदी के किनारे खेती करने वालों से टैक्स वसूलने के उद्देश्य से शुरु हुई. आड़े सीधे खेतों को मापना आसान नहीं था परंतु, धीरेधीरे यह ज्ञान बढ़ा.

1300 से अधिक विज्ञान

क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे कि कुल 1300 से अधिक विज्ञान हैं जिनमें बायोनिक्स सापेक्ष रुप से नया है. आज वैज्ञानिक पेड़ पौधे, जीव जन्तुओं, पशु पक्षियों, जल जीवों और कीटों की उन खासियतों पर अध्ययन कर रहे हैं जोकि उन्हें खास बनाती है. रुसी वैज्ञानिक ने बीवर के दांतों का अध्ययन कर एक उत्तम कटर ब्लेड बनाया है जिसे बीवर कटर नाम से लेथ मशीनों में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी प्रकार डॉग की सूंघने व सुनने की शक्ति पर भी अध्ययन हो रहे हैं. धरती पर कोई अन्य जीव मनुष्य की 100 वर्ष की आयु का मुकाबला नहीं कर पा रहा है परंतु कई जल जीव 1000 वर्ष तक जीते हैं. अगर यह जानना चाहते हैं तो जाइए पढ़िए बायोनिक्स का विज्ञान या फिर मत्स्य विज्ञान.

कौन सा विज्ञान पढ़े हम

अब एक प्रश्न सहज ही हमारे मन मस्तिष्क में पैदा होता है कि हम कौन सा विज्ञान पढ़े. इसका उत्तर तो आप खुद ही दे सकते हैं कि आपको विज्ञान का अध्ययन पैसा कमाने के लिए पढ़ना है या परिवार के व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पढ़ना है. आपको यह भी देखना होगा कि वह विज्ञान अपने देश में पढ़ाया भी जाता है या नहीं. इसे पढ़ने के लिए आपके पास आवश्यक योग्यता है या नहीं. आज से आधी सदी पहले मैथ्स ओलंपियाड शुरु हो गया था. बाद में फिजिक्स, कैमेस्ट्री, एस्ट्रोनोमी, बायोलॉजी वगैरह के ओलंपियाड भी हो रहे हैं, जिनमें भारतीय किशोर खूब नाम कमा रहे हैं.

 एक पुराना विषय है होम्योपैथी जिसका भविष्य बहुत अच्छा है. पुराने से पुराने रोग को शर्तिया ठीक करने वाली यह चिकित्सा अब ज्यादा लोकप्रिय हो रही है. 200 वर्ष पुरानी यह जर्मन पद्धति दवा को अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में इस्तेमान करती है, जिस मात्रा पर मापन की कोई वैज्ञानिक विधियां भी काम नहीं करती.

 क्या आप पक्षियों में दिलचस्पी रखते हैं. क्या आपको उन पक्षियों के नाम पता हैं जो उड़ नहीं पाती. क्या आपको पता है कि जिम्बाववे, डोमिनिका, युगांडा, ग्वाटेमाला, किरीबाती, अल्बानिया, ईजिप्ट, मैक्सिको, माल्डोवा, कजाकिस्तान, जाम्बिया आदि के राष्ट्र ध्वजों पर एकएक पक्षी भी अंकित है.

 क्या ऐसा कोई हफ्ता गुजरता है जबकि बड़े अखबारों में एलियंस तथा उड़न तश्तरियों की खबरें न छपती हो. वैज्ञानिक स्तर पर भी अंतरिक्ष में जल और जीवन की खोज बाकायदा 60-70 सालों से हो रही है. कई चंद्रयात्रियों ने स्वयं कहा है कि उनके यान के पास उड़नतश्तरियां आ गई थीं, जब वे चंद्रमा के करीब थे. परंतु नासा ने अधिकृत तौर पर यह सब नकार दिया है. हाल में ही विख्यात खगोलविद स्टीफन हॉकिंग ने कहा है कि हरेहरे एलियंस होने ही चाहिए, वो भी तीनतीन सौ किलो के. पूर्व में कार्ल सैगन ने गणना की थी कि पृथ्वी सदृश ग्रहों की संख्या अपनी आकाशगंगा में एक मिलियन के करीब होनी चाहिए. फिर ड्रेक समीकरण ने इस संख्या को 10,000 बताया. अब चंद्रयात्रियों तथा स्टीफन हॉकिंग के वक्तव्यों से इस विषय में नई उत्सुकता पैदा हुई है.

  ब्रह्मांड में जीवन की खोज के इस विषय को पढ़ने के लिए दुनिया में कई कॉलेज व विश्वविद्यालय हैं परंतु अपने देश में केवल एक ही स्थान है जिसका नाम इंडियन एस्ट्रोबायोलॉजी रिसर्च सेंटर, मुंबई है. इस संस्थान की स्थापना 2006 में हुई थी.

बॉक्स….विज्ञान का स्कोप और भविष्य

पादप विज्ञान : पेड़ पौधों, बोन्साई का, प्रकाश संश्लेषण का, ग्वोबल वार्मिंग से जूझने का, दुनिया को सुंदर हरा भरा बनाने वाला यह विज्ञान अद्भुत है. जो रसायनिक क्रियाओं पौधों में जल, प्रकाश संश्लेषण जैसे सामान्य पदार्थों, सामान्य ताप व दाब पर होती है, उन्हें नोबोलविद रसायनशास्त्री भी अपनी लैब में नहीं कर पाते. जैव विविधता का स्रोत भी बोटनी है.

मत्स्य विज्ञान : व्हेल मछली नहीं क्योंकि यह अंडे नहीं देती, बच्चा पैदा करती है. तो मत्स्य विज्ञान के अनुसार व्हेल शार्क ही सबसे बड़ी मछली है. मछलियों की विशेषताएं, इनके प्रकार, सर्दियों में अंटार्कटिका में बर्फ के नीचे रहते मत्स्य जीवन सभी कुछ इस विज्ञान समाया है. क्या आपको पता है कि प्रशांत महासागर के उपरी सतह के 11 किलोमीटर नीचे मेरियाना ट्रेंच में भी मछलियां जिंदा हैं. क्या यह आश्चर्य नहीं है.

होरोलॉजी : स्टीफन हॉकिंग लिखित ‘ए ब्रीफ हिस्टरी ऑफ टाइम’ तथा पॉल डेविज लिखित ‘अबाउट टाइम’ पुस्तकों ने मानो हमारे ब्रह्मांड के चौथे आयाम यानी समय को एक संपूर्ण विज्ञान विषय ही बना डाला है. तो होरोलॉजी के अंतर्गत हम समय, समय मापन में इस्तेमाल होने वाली घड़ियों यंत्रों आदि का विस्तृत अध्ययन करते हैं. आईंस्टाइन ने इसे चौथा आयाम बना कर बड़ा कार्य किया है.

ग्रीन कैमेस्ट्री : इस विज्ञान से हमारी समूची पृथ्वी के जल, थल व वायुमंडल का बचाव हो सकता है. इस ज्ञान से ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, ओजोन परत क्षति व सामाजिक चेतना द्वारा प्राकृतिक संतुलन की पुनर्स्थापना की जा सकती है. दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज जैसे कुछ संस्थान इस कैमेस्ट्री को पढ़ा रहे हैं.

क्रिप्टोजूलॉजी : अनेक प्राचीन ग्रंथों में, लोकगीतों-कथाओं में महाबली राजाओं, अद्भुत पशुओं-पक्षियों आदि का वर्णन इस प्रकार होता है कि आज यह सब हमें काल्पनिक लगता है. मगर कई वैज्ञानिक ऐसे हैं जो कि हिमालय के दैत्यकार यती, रामायण के जटायु, उड़नतश्तरियों वाले एलियंस तथा लेख नेस मोंस्टर की कहानियां पर विश्वास करते हैं और इस संबंध में खूब खोज करते हैं. इन विषयों को क्रिप्टिड्स तथा खोजियों को क्रिप्टोजूलॉजिस्ट कहा जाता है.

मौसम विज्ञान : आज का सबसे चुनौतीपूर्ण विज्ञान ग्लोबल वार्मिंग आदि के कारण आज सारे मौसम गड्ड-मड्ड हो रहे हैं यधपि पृथ्वी पहले की ही तरह सूर्य की परिक्रमा कर रही है. जनसंख्या विस्फोट, ग्राउंड वॉटर हारवेस्टिंग, प्रदूषण आदि के चलते मौसम संबंधी उपग्रह भी नाकाम हो रहे हैं. पता ही नहीं चल रहा है कि कहां किस वक्त अचानक घनघोर वर्षा हो जाए, वनों में आग लग जाए. मौसम विज्ञान को नये युवा मस्तिष्कों-विचारों की बहुत जरुरत है.

होम्योपैथी चिकित्सा : 200 वर्ष पूर्व जर्मन डॉक्टर हैनीमैन द्वारा खोजे ‘विष ही विष की औषधि’ सिद्धांत पर आधारित यह पद्धति अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में औषधि का प्रयोग करती है और पुराने रोगों को भी ठीक करने में लोकप्रिय है. इसका वैज्ञानिक सिद्धांत सिद्ध नहीं हुआ क्योंकि आण्विक सेतर पर मात्रात्मक विश्लेषण आज तक संभव नहीं हो पाया. फिर भी यह अधिक लोकप्रिय हो रही है और लगता है कि सुपरकंडक्टिविटी की तरह अत्यंत सांद्रता पर यह विशेष प्रभावशील है.

एवियोनिक्स : वे इलेक्ट्रिक सिस्टम उपकरण जोकि विमानों हेलिकॉप्टरों आदि मशीनों को उड़ाते और नेविगेट करते हैं. जाहिर है कि मिसाइलों से लेकर अंतरिक्ष यानों के इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन उपकरण एवियोनिक्स के तहत ही आते हैं.

अंतरिक्ष जैविकी : इस विज्ञान में अंतरिक्ष में बैक्टीरिया से लेकर एलियंस की खोज व अध्ययन समाहित है. जाहिर है कि पृथ्वी के साथ ही अन्य ग्रह-उपग्रह भी इसी में आते हैं क्योंकि वहां जीवन की संभावनाएं मौजूद रहेंगी.






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