Main Menu

सही पोषाहार स्वास्थ्य जीवन की कुंजी

आहार पाक कला और चिकित्सा विज्ञान का उत्तम समन्वय ही नहीं, रोग के निदान और स्वस्थ जीवन की कुंजी है. बहुत कम डॉक्टर सही मायनों में मरीज़ों को यह कुंजी थमाने में प्रवीण होते हैं.

रोग और जीवनशैली तथा पोषाहार के बीच बुनियादी रिश्ता है. रोगियों की चिकित्सा के साथ-साथ उनकी दैनिक दिनचर्या में प्रबल परिवर्तन की विवरणिकाओं में सावधानीपूर्वक खाने और शारीरिक श्रम बढ़ाने के परामर्श के अलावा स्वस्थ भोजन सुस्वादु बनाने के नुक़्ते भी ज़रूरी हैं. लुइज़ियाना की प्राइवेट यूनिवर्सिटी ट्यूलेन के गोल्डरिंग सेंटर फ़ॉर क्युलिनरी मेडिसिन ने चिकित्सा के इस पक्ष को उजागर करने के लिए इसे क्युलिनरी मेडिसिन की संज्ञा दी. इतना ही नहीं, गोल्डरिंग सेंटर ने जॉनसन ऐंड वेल्ज़ यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ क्युलिनरी आर्ट्स के सहयोग से एक पाठ्यक्रम शुरू किया और पौष्टिक भोजन सुस्वादु बनाने का व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए एक लाइसेन्स प्राप्त शेफ़ को प्रशिक्षक नियुक्त किया. ‘पाकशास्त्री डॉक्टर’ के नाम से खाद्य मीडिया की दुनिया में मशहूर डॉक्टर टिमोथी हार्लन सेंटर के कार्यकारी निदेशक हैं. वे जन स्वास्थ्य को हर चिकित्सक का परम ध्येय मानते हैं. जंक और फ़ास्ट फ़ूड निम्न आय वर्ग की बहुत बड़ी कमज़ोरी है जिनकी वजह से मोटापा और मधुमेह विकराल रूप धारण करता जा रहा है और जिसके उपचार से पहले रोकथाम ज़्यादा ज़रूरी है. क्यूलिनरी मेडिसिन में प्रशिक्षित भावी डॉक्टर निम्न आय वर्ग के मरीज़ों को भी सिखा सकेंगे कि कम लागत वाली सामग्री से बहुत कुछ और कैसे बनाया जा सकता है. इस विचारधारा के क़ायल अस्पतालों में फ़ूड बैंक्स खोले जा रहे हैं, डॉक्टर सुपर मार्केट्स में जाकर ख़रीददारों को सही खानपान की सलाह देने लगे हैं, महंगी खाद्य सामग्री के कम ख़र्चीले विकल्प बताने लगे हैं. बाल चिकित्सक छोटे बच्चों में अधिक गुणकारी सब्ज़ियों की रुचि जगाने के उपाय सुझाने लगे हैं.

गोल्डरिंग सेंटर में पोषाहार प्रवृत्त डॉक्टरों को ही नहीं, स्वास्थ्य केंद्रित गोर्मे शेफ़्स को भी आला डिशेज़ हेल्दी बनाना सिखाया जाता है. जॉनसन ऐंड वेल्ज़ यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ क्युलिनरी आर्ट्स के छात्रों को गोल्डरिंग सेंटर में वैज्ञानिक अनुसंधान में भाग लेने के अवसर भी मिलते हैं। कार्डिओलोजिस्ट डॉक्टर स्टीफ़ेन डेवरीस द्वारा स्थापित द गेपल्ज़ इंस्टिट्यूट फ़ॉर इंटेग्रेटिव कार्डिओलोजी नामक निर्लाभ संगठन का उद्देश्य है पोषाहार और स्वस्थ दिनचर्या द्वारा हृदयरोग का निवारण. गोल्डरिंग सेंटर फ़ॉर क्युलिनरी मेडिसिन की वेबसाइट पर हर्ब्ज़ और तनिक खटास से दैनिक खानपान को सुस्वादु बनाने के बहुत सरल तरीक़े हैं. कुछ से तो हम भली भांति परिचित भी हैं.

  भारतीय रसोई की दाल उत्तम सूप है. सादे पानी में सब्ज़ियों के छिलके उबाल कर स्टॉक बना रखिए. उसमें दाल-सब्ज़ी अधिक रुचिकर बनेंगी. मीट स्टॉक से नॉन-वेजिटेरीयन डिशेज़ का स्वाद बढ़ेगा. घी-मक्खन-मलाई का विकल्प है गाढ़ी दही. दाल में मनपसंद सब्ज़ियां और चाहें तो चिकन वग़ैरह डालिए और नाममात्र घी-तेल से छौंकने के बाद गाढ़ी दही से स्वादवर्धन कीजिए. सादे बेसन या दाल की पकौड़ियों को तलने की बजाए भाप में या खौलते खुले पानी में पकाइए वरना ढोकले सरीखी बना कर और तवे पर हल्की चिकनाई में सेंक कर चाहे वैसे ही खाइए या उबलती कढ़ी में डालिए. चोखा केवल आलू या बैंगन का ही नहीं अन्य सब्ज़ियों का भी बन सकता है. गोभी, कद्दू, लौकी, तुरई, गाजर, मटर आदि का अलगअलग या मिला-जुला कर बना देखिए. उबले काबुली चनों से चटनी सरीखा हम्मस काले चनों, चुक़ंदर, राजमा, लोभिया, चने या मूंग की दाल से भी बन कर कम स्वादिष्ट न होगा.

फ़्राइड की बजाए बेक्ड पोटेटो चिप्स, पापड़, खाखरा, सूखा पोहा, चना-मुरमुरा-सींगदाना, पॉपकॉर्न, खील, सूखे मेवे-फल, पपीते-कद्दू-सनफ़्लावर के भूने बीज, ख़रबूज़े की मींग और ग्रनोला आदिसे स्नैकिंग कीजिए. केले के स्लाइस प्लास्टिक बैग में फ़्रीज़ करके खाइए. किशमिश की तरह सूखी स्ट्रॉबेरी, चेरी, कमरख, पाइनैप्पल, आम, करौंदे, अनारदाना, बेर आदि भी फांकने के लिए उत्तम हैं. सुखाने के लिए धूप न मिले तो बहुत धीमी आंच में बेक कर लीजिए. तीसरे पहर हल्दी-अदरक़ मिली कॉफ़ी-चाय को शहद से हल्का मीठा कीजिए. चीनी की बजाए शहद मिली शिकंजबी में खीरे-ककड़ी का रस, चुटकी नमक, पिसा ज़ीरा व काली मिर्च, क्लब सोडा और कुटी बर्फ़ मिलाने से तरावट का भरपूर मज़ा आएगा. शाही स्वाद के लिए घी-तेल ही ज़रूरी नहीं, काजू, बादाम, तिल, पोस्त से ग्रेवी को रिच किया जा सकता है, मसालों का जादू जगाया जा सकता है. रिच ग्रेवी के लिए प्याज़-लहसुन-अदरक-टमाटर के पेस्ट को घी-तेल में भूनने की बजाए इन्हें साबुत शक़्ल में कड़ाही या तवे पर अलगअलग सूखा भून लीजिए. चार-छः बादाम, काजू या चम्मच भर ख़स-ख़स और तिल भी सूखे भून कर सब चीज़ों के साथ ज़रा से दूध में उबाल कर मिक्सी में पीसिए. चाहें तो छान भी लीजिए. एक चम्मच भर घी-तेल में ज़ीरे के तड़के के साथ पिसा मसाला हल्का भून कर और ग्रेवी में मनपसंद भूनी सब्ज़ियां, पनीर या मीट मिला कर दम देने से शाही डिश का स्वाद आएगा.

            ब्रेकफ़ास्ट का सबसे उत्तम विकल्प है स्मूदी. शहद, लो-फ़ैट दूध-दही और सहज उपलब्ध फलों या ज़्यादा पके केलों का पौष्टिक ब्लेंड पीकर भूख जल्दी नहीं लगेगी. संतरे, अनार, आम, अनन्नास, स्ट्रॉबेरी के अलावा ख़रबूज़े, तरबूज़, अमरूद या टमाटर, पालक आदि की चटपटी जूस कॉक्टेल्ज़ बनाइए. कच्ची या छौंकी  अंकुरित दालें स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता हैं. गाजर, मूली, खीरे, ककड़ी आदि के पतले क़तलों को नाममात्र सेंधे नमक, शहद, कुचले लहसुन के जवों, साबुत काली व लाल मिर्च के साथ नींबू या सिरके की खटास में धनिए-पुदीने के पेस्ट से चटपटा सलाद या हालाहाल खाया जानेवाला अचार बनाया जा सकता है. आलू, गोभी, ब्रौक्कोली, शकरकंदी, गाजर, बींज़, कद्दू, बैंगन आदि को छौंकने के लिए तेल की चंद बूंदें काफ़ी हैं. ज़ीरे, अजवाइन, करी पत्ते, मोटी कुटी काली मिर्च, पिसे धनिए और मेथी पाउडर के साथ धीमी आंच पर भूनने या बेक करने से स्वाद बढ़ेगा. खटास बढ़ा देने से नमक की कमी नहीं खलेगी. साइड डिश की तरह खाइए या दाल के पानी में उबाल कर सूप बनाइए.

बच्चों को मैकरोनी-चीज़ बहुत भाती है तो उसे मैदे की जगह आटे के पास्ता, लो-फ़ैट चीज़ से बनाइए. सॉस में मक्खन वग़ैरह कम करके भूनी-पीसी सब्ज़ियों, पालक आदि की मिक़दार बढ़ा दीजिए. बाज़ार में उपलब्ध बने-बनाए खाने में स्वादवर्धन के लिए चीनी-नमक-चिकनाई और ऐडिटिव-प्रिज़र्वेटिव पर नियंत्रण नहीं हो सकता. खाना बनाना भी एक तरह की थेरपी है। समय और सुविधानुसार ताज़ा खाना बनाइए और खाइए.

 






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *