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सडक़ों पर दौडऩे को तैयार इलेक्ट्रिक कार

काफी समय से हम इलेञ्चिट्रक कार के बारे में सुन रहे हैं, लेकिन अब सच में भारत की सडक़ों पर पेट्रोल व डीजल कार की जगह इलेञ्चिट्रक कार ही दौड़ेगी. लगातार बढ़ते प्रदूषण के बाद अब केंद्र सरकार ने इलेञ्चिट्रक कारों को लेकर अपना नजरिया साफ कर दिया है.
इंधन की कीमत में आ रही उछाल और खपत के मद्देनजर वाहन निर्माता अब दूसरे विकल्पों पर जोर दे रहे हैं. इस क्रम में वाहन निर्माताओं का ध्यान सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक विकल्प की तरफ गया है. इस समय दुनिया भर में ऑटोमोबाइल कंपनियां कई शानदार इलेक्ट्रिक कारों को पेश कर चुकी है जो कि अपने सेगमेंट में काफी बेहतर हैं और शानदार प्रदर्शन भी कर रही हैं. आपको बता दें कि, ये इलेक्ट्रिक कारें न केवल रोज-रोज आपके जेब पर पडऩे वाले भार को कम कर रही है बल्कि ये कारें उन सभी सुविधाओं से लैस हैं जो कि एक आम कार में होती हैं।

हालांकि ये कार विदेशों की सडक़ों पर पर भी दौड़ रही है. और अपने देश में महेन्द्रा ‘ई2’ के नाम से इस कार को लॉन्च कर चुका है. लेकिन, अभी हमारे देश में इन कारों को लेकर लोगों का रूझान उतना नहीं है जितना होना चाहिए, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन कारों का प्रति रूझान कम इसलिए है क्योंकि ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि इलेक्ट्रिक कार झंझट का सौदा है और इन कारों से वो रफ्तार और टॉर्क नहीं मिलता जो पेट्रोल या डीजल की कारों से मिलता है. ये किसी हद तक ठीक भी है. लेकिन, समय के साथ हमे टेक्नोलॉजी को बदलना ही होता है और जब मामला पर्यावरण से जुड़ा हो तो फिर मामले की गंभीरता को हमें समझना ही होगा।
इलेक्ट्रिक कारें देश में बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी महेन्द्रा एंड महेन्द्रा का मानना है कि अगर सरकार इस प्रोजेक्ट में गंभीरता से विचार करे तो 2030 का 30 प्रतिशत का जो लक्ष्य सरकार ने निर्धारित किया है उसे हासिल किया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले देश में बिजली उत्पादन को हमें समझना होगा और देश में ऐसे सर्विस स्टेशनों को लगाना होगा जो इन कारों के लिए चर्जिग प्वांइट दे सके यानी पेट्रोल पंप की ही तरह हमें ऐसे चार्जिंग प्वाइंट लगाने होंगे जो इन कारों को चार्ज कर सके, क्योंकि अभी तक इन कारों को इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग कार को चार्ज घर में ही अपने बिजली का प्वाइंट से करते हैं।
हालांकि वहीं दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक व्हीकल मोबिलिटी मिशन प्लान का ऐलान होने के बाद इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी महिंद्रा रेवा अपने नए मॉडल के साथ बाजार में आने के लिए तैयार है. हालांकि बेहतर तकनीक का नमूना होने के बावजूद ज्यादातर कंपनियां नफा नुकसान का पूरा जायजा लेने के बाद ही इलेक्ट्रिक व्हीकल पर अपना अगला कदम बढ़ाएंगी.
इलेक्ट्रिक व्हीकल मोबिलिटी मिशन 2020 का औपचारिक ऐलान होने के बाद ऑटो कंपनियां अब हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक व्हीकल के कमर्शियल उत्पादन का रोडमैप तैयार करने में लग गई हैं. इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली देश की सबसे बढ़ी कंपनी महिंद्रा रेवा भी प्लान के ऐलान का इंतजार कर रही थी।
महिंद्रा का कहना है कि प्लान के बाद अब वो अपनी नेक्स्ट जेनरेशन इलेक्ट्रिक कार ई2ओ जल्द लॉन्च करेगी. कंपनी इस कार का उत्पादन अपने बेंगलुरु के नए प्लांट से करेगी. इस कार को सिटी ड्राइव के लिए तैयार किया है. ये कार एक बार चार्ज करने पर 100 किलोमीटर का सफर तय कर सकेगी और इसे आसानी से घर या दफ्तर में चार्ज किया जा सकेगा.
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने ऑटो एक्सपो में अपनी इलेक्ट्रिक यूटिलिटी व्हीकल ईको और हाईब्रिड सेडान कार एसएक्स4 का प्रदर्शन किया था। दोनों कार सुजूकी के ग्लोबल इंजीनियरिंग टीम ने मिल कर तैयार की थी. हालांकि उस समय कंपनी का कहना था कि महंगी तकनीक होने की वजह से इन कारों को बाजार में नहीं लॉन्च किया जाएगा. लेकिन अब मारुति का कहना है कि कंपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्लान की समीक्षा करेगी और हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक व्हीकल तकनीकी के इस्तेमाल पर अंतिम फैसला सुजूकी का होगा।
इसी तरह रेवा के साथ पहले साझेदारी में छोटी इलेक्ट्रिक कार स्पार्क बनाने वाली कंपनी शेवरले ने कहा है कि कंपनी के पास तकनीक है लेकिन इलेक्ट्रिक कारों के उत्पादन पर कोई फैसला इन्फ्रास्ट्रञ्चचर तैयार होने के बाद ही लिया जाएगा. कंपनियों का कहना है कि बेहतरीन तकनीक होने के बावजूद काफी मंहगी होने की वजह से और देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल का इन्फ्रास्ट्रञ्चचर नहीं होने की वजह से इन कारों का व्यावसायिक उत्पादन अब तक संभव नहीं है और वहीं, अगर दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कार की बात की जाए तो बहुत से देश ऐसे हैं जहां पर इलेक्ट्रिक कारें सडक़ों पर फर्राटा भर रही है. इसमें टेकसला वो कार है जो जल्द ही भारत आने वाली है. ये कार 6 सेकेंड में 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है और एक बार चार्ज करने पर 350 किलोमीटर तक चल सकती है।
ई-व्हीकल की खातिर चार्जिंग इंस्फास्ट्रक्चर में जुटा इंडिया इंक

देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की संख्या बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य में मदद के लिए इंडिया इंक ने योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं. इनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरियां खरीदना और चार्जिंग के लिए सुविधाएं बनाना शामिल हैं. सरकारी अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने देश की महत्वाकांक्षी ई-व्हीकल योजना के महत्वपूर्ण हिस्से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रञ्चचर को तैयार करने के लिए 50 से अधिक भारतीय और विदेशी कंपनियों के साथ बातचीत की है. इनमें टाटा पावर, एक्साइड, एमरॉन, पावर ग्रिड कॉर्प, एनटीपीसी और एबीबी शामिल हैं. ऐप के जरिए कैब सर्विसेज देने वाली ओला और इस सेगमेंट की कुछ अन्य फर्में भी इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और ई-रिक्शा खरीदकर उन्हें लीज पर देने पर विचार कर रही हैं।
टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने दिल्ली मेट्रो और दिल्ली नगर निगम के साथ पार्टनरशिप कर मेट्रो स्टेशनों और अन्य संभावित स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनाने की जानकारी दी है. कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा ने बताया कि एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन के लिए लगभग 25 लाख रुपये के इनवेस्टमेंट की जरूरत है, जबकि अधिक समय में चार्जिंग करने वाले आउटलेट की कॉस्ट करीब 1 लाख रुपये होगी. उनका कहना था कि अगले पांच वर्षों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की सेल्स बढऩे पर 3 किलोमीटर के क्षेत्र में करीब 300 चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी. इनमें से प्रत्येक स्टेशन में 4-5 चार्जिंग स्लॉट होंगे. इस लिहाज से पूरी दिल्ली में चार्जिंग स्टेशंस शुरू करने पर पांच वर्षों में करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, और वहीं, एनटीपीसी और पावर ग्रिड कॉर्प जैसी सरकारी कंपनियां लगभग आधा दर्जन शहरों में बैटरी चार्जिंग और रैपिड व्हीकल चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए जमीन को लेकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्प (डीएमआरसी) और अन्य एंटिटीज के साथ बातचीत कर रही हैं. एनटीपीसी और पावर ग्रिड कॉर्प की योजना बड़ी संख्या में बैटरियां खरीदकर उन्हें लीज पर देने की भी है क्योंकि सरकार सरकार कॉस्ट कम करने के लिए बिना बैटरी के इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स की बिक्री को बढ़ावा देना चाहती है। एक्साइड, एक्मे इंडस्ट्रीज, एमरॉन बैटरीज, माइक्रोटेक और एबीबी भी बैटरियों की सप्लाई करने, बैटरी बदलने की दुकानें खोलने या व्हीकल चार्जिंग स्टेशंस में अपने लिए संभावनाएं तलाश रही हैं। अभी इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स की संख्या बहुत कम है।

गंभीर समस्या बन गया है बढ़ता प्रदूषण : केन्द्रीय परिवहन मंत्री

आज दुनिया में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है. इसके अलावा तेल के विकल्प पर भी हमें सोचना होगा. हालांकि बहुत समय से बॉयोफ्यूल की बात की जा रही है. जिसमें एथोनॉल का पेट्रोल के साथ प्रयोग हम लंबे समय से कर ही रहे हैं. लेकिन, इसके अलावा भी हमें आने वाले समय में यातायात के साधनों को चलाने के लिए एक नये विचार को समझना होगा. और इसी दिशा में इलेक्ट्रिक कारें मील का पत्थर साबित हो सकती हैं. और ये सिर्फ कार की बात नहीं है. ये यातायात को बदलने की भी बात है. सरकार की कोशिश है कि 2030 तक 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक गाडिय़ों को सडक़ों पर लाया जाए. इसमें ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़े बदलाव किए जाने की भी योजना है. जिसके बाद ईंधन आयात कम करना लक्ष्य होगा. हमें ये भी जानना और समझना होगा कि फॉसिल फ्यूल के इंजन 3 लाख के बाद बेकार हो जाते हैं.
एक्सपर्ट्स की राय

देखिए जैसे उन्होंने बोला ई व्हीकल आ जाएगा तो प्रदूषण खत्म हो जाएगा. कल की बात करना और आज की बात करना ठीक नहीं है. बिजली हमारे पास नहीं है 20 हजार गांव हैं जहां बिजली नहीं है. 3 लाख मेगावाट जो बिजली हम जनरेट करते हैं उसमें ज्यादातर उत्पादन डीजल इंजन की है. पहले यहां तो बिजली दें. 2030 की बात तो बाद में सोचेंगे. नंबर तीन हमने सीएनजी 1999-2000 में शुरू किया था. आज 2017 है आज तक सीएनजी कहां तक बढ़ा है. ये तकनीक आने की बात नहीं है तकनीक को लागू करने की बात है. पहले जमीनी स्तर पर चीजें ठीक होनी चाहिए. देश के हर कोने में बिजली पहुंचनी चाहिए. बिजली का उत्पादन बढऩा चाहिए. हां, ये बात बिल्कुल ठीक है कि इस कार के आने के बाद बहुत सी चीजे बेहतर हो सकती है. प्रदूषण की समस्या उसमें से एक है।
जगदीश खट्टर- एम डी, कारनेशन

मंत्री जी का सपना अच्छा है. उसे हम नकार नहीं सकते. ये सपना तरक्की का है और तरक्की में थोड़े बहुत ऑड-ईवन आते ही है. लेकिन, हमें ये समझना चाहिए कि आखिर हम तेल के सहारे कब तक बैठे रहेंगे. एक ना एक दिन हमें अपने ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बदलाव करना ही होगा. और अगर वो अब शुरू होता है तो ये अच्छा है. और वहीं, अगर भारत में फ्यूल बिल की बात की जाए तो भारत का फ्यूल बिल 2018 में लगभग 85 बिलियन डॉलर का हो सकता है. जो हमारी इकनॉमी का एक बड़ा हिस्सा होगा.
विष्णु माथुर , डायरेञ्चटर जनरल, एसआईएएम






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