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रुकें नहीं कदम, हौसलों में रहे दम

हर कोई चाहता है कि इस साल सक्सेस, अचीवमेंट्स और गुड न्यूज से भरा हो, लेकिन व्यावहारिक जीवन में ऐसा हो पाना सम्भव नहीं होता. उतारचढ़ाव तो जिंदगी का अहम हिस्सा है. कई बार हमारे सामने तरहतरह की मुसीबतें आ जाती हैं. ऐसे में तरक्की की ओर बढ़ते आपके कदम कुछ समय के लिए थम सकते हैं, लेकिन आपको हिम्मत हार कर बैठना नहीं है, बल्कि सफलता के सफर को जारी रखना है.

  ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपके इर्दगिर्द सिर्फ खराब चीजें ही हों. कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में कंसल्टेंट साइकोलोजिस्ट डॉ. संजय गर्ग कहते हैं, अक्सर घबराहट की स्थिति में लोग अपने चारों ओर सिर्फ बुराई और निगेटिव चीजें ढ़ूंढ़ते रहते हैं और उन्हें कोस कोस कर न सिर्फ खुद चिड़चिड़े हो जाते हैं बल्कि घर वालों और अपने संगी साथियों का भी मूड चौपट कर देते हैं. बेहतर यह होगा कि आप अपने इर्द गिर्द मौजूद अच्छी चीजों औऱ अच्छे लोगों का नोटिस लें. अच्छी चीजों को सराहें. अच्छे लोगों से संपर्क बढ़ाएं, उनसे बातें करें और उनकी संगत में कुछ वक्त गुजारें. इससे आपको हौसला भी मिलेगा और साथ ही निगेटिव चीजों की ओर से आपका ध्यान बंटेगा व खुशी मिलेगी.

आशावादी बनें – ‘ब्रेकिंग मर्फी’ज ला’ की लेखिका और अनुसंधानकर्ता सुजेन सेजरस्ट्रम कहती हैं, ‘अच्छी चीजों की उम्मीद रखना आपको दीर्घायु, स्वस्थ औऱ खुशमिजाज बनाता है. खुशी एक अहसास है जबकि आशा एक विश्वास है कि आपके जीवन में आने वाला समय अच्छा होगा. आशावादी लोग खुशी के उतार चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते औऱ आदतन खुश ही रहते हैं. हर किसी की जिंदगी में बहुत सारी अच्छी बातें भी होती हैं, लेकिन निराशावादी लोग उनका नोटिस नहीं लेते. अगर आप हर रोज अपने साथ घटी तीन पॉजिटिव घटनाओं को लिखने की आदत डालें तो खुशी आपसे कभी दूर नहीं जाएगी.

हर वक्त प्रॉब्लम डिस्कस न करें-

दिन रात अपनी असफलताओं या दुःख के बारे में न सोचते रहें. डॉ. संजय गर्ग कहते हैं, ‘लगातार अपनी तकलीफों, पराजय या असफलताओं पर चिंतन या हर किसी से इसी की चर्चा करते रहने से आप लो फील करते हैं और निगेटिव भाव से ऊबर ही नहीं पाते हैं. हमें हर वक्त बस अपनी तकलीफें ही नजर आती हैं. आप जितनी बार दूसरों से इस सम्बन्ध में चर्चा करते हैं उतनी बार दुःख और निगेटिविटी महसूस करते हैं, ऐसे में तकलीफ कम होने की बजाय बढ़ जाती है.

तारीफ करने की आदत डालें –

मनोचिकित्सक डॉ संजय गर्ग का कहना है कि आपका कोई फ्रेंड, पड़ोसी, सहकर्मी या परिचित नया व्यंजन बनाए, कोई रचना लिखे, नई ड्रेस पहने, तो उसकी तारीफ करना सीखें. इससे उसके मन में आपके प्रति पॉजिटिव सोच की तरंगें उठेंगी. जब ऐसा करना धीरे धीरे आपकी आदत बन जाएगी तो यकीन मानिए दूसरे लोग भी आपकी तारीफ़ करके आपका मूड अच्छा रखने के लिए सचेष्ट रहेंगे. खुशी के लिए यही तो चाहिए कि आपके आसपास का माहौल अच्छा हो.

आलोचनाओं पर गौर करें-

मुसीबत के वक्त आपको लोगों की आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता है. इन आलोचनाओं को गौरपूर्वक सुनें. कई बार उनमें आपके काम की बातें छिपी होती हैं और सामने वाला आपके कमजोर पक्ष की जानकारी दे रहा होता है. उन सुझावों पर ध्यान देकर अपनी कमियों को पहचानें. घबराने या मानसिक संतुलन खोकर किसी पर दोषारोपण करने अथवा क्रोधित होने की बजाय धैर्य रखें और खुद पर पूरा विश्वास रखें. अगर आपसे गलती हो भी गई तो उस पर बार-बार पछताने की बजाय खुद से वादा करें कि आप ऐसी गलती दोहराएंगे नहीं और खुद को इसके लिए क्षमाकर दें. अपनी स्किल्स को बढ़ाएं और अच्छे व सफल लोगों के साथ अपने सम्पर्क बढ़ाएं. ये लोग आपको निरंतर कुछ अच्छा करने की प्रेरणा और सलाह देंगे. खुद को क्रिएटिव व अपने रूटीन कार्यों में पूरी तरह व्यस्त रखें. इससे आपको बेवजह चिंतित होने का मौक़ा नहीं मिलेगा.

झुन्झलाएं नहीं, सेल्फ रिव्यू करें–

जब वक्त आपके फेवर में न हो, सफलता हाथ न लग रही हो और हर दिन किसी से टकराव या वाद विवाद हो रहा है, तो खुद को या अपनी तकदीर को कोसने की बजाए सेल्फ रिव्यू करें. असफल होने पर हार मानने और अंधेरे कमरे में बैठने की बजाय उसके कारणों की समीक्षा करें और अपने काम का तरीका बदलने पर विचार करें. नई चीजें सीखने और खुद को इम्प्रूव करने में जोर लगाएं. कहीं आप में काम टालने की आदत तो नहीं, समय का दुरूपयोग करने के कारण कार्यक्षमता तो नहीं घट गई, कार्य करने की योजना में कोई खामी तो नहीं. जरूरत पड़ने पर अपने नजदीकी और समझदार मित्रों से बैठकर बात करें और उनसे सलाह लें. जैसे ही आपको प्रॉब्लम का हल मिलेगा आपका मुरझाया हुआ मन खुशियों से झूम उठेगा.

समस्याओं को चैलेन्ज समझें –

हर वक्त चिड़चिड़े, परेशान एवं मुंह लटकाए व्यक्तियों और खुशमिजाज, चुस्त फुर्तीले लोगों में एक बुनियादी फर्क होता है. पहले किस्म के लोग किसी भी स्थिति या दुरूह कार्य को ‘प्रॉब्लम’ के नाम से पुकारते हैं औऱ उदास होकर बैठ जाते हैं. जबकि दूसरी किस्म के लोग इसे ‘एक नई चुनौती’ व इसे अपनी क्षमताओं को साबित करने का अवसर मानते हैं और अपनी रणनीति बनाने में जुट जाते हैं. बाधाओं को सामने देख उनसे मुंह छिपाना या पलायन करना उदासी और अज्ञात भय का सबब बन जाता है जबकि बाधाओं को चुनौती मानना और अपने कौशल के बल पर उनसे पार पाना खुशी का गहरा अहसास दे जाता है.

परफेक्शनिस्ट नहीं बनें –

हर घटना, हर परिस्थिति और जीवन की हर बात पर आपका काबू नहीं हो सकता. जीवन में अच्छी और बुरी हर तरह की घटनाएं घटती रहती हैं. एक जैसे प्रयास भी कई बार अलग अलग परिणाम देते हैं. अनहोनी या आकस्मिक कुछ भी, कभी भी हो सकता है. इसलिए मानसिक रूप से जीवन के इन उतार चढ़ावों को झेलने के लिए तैयार रहें और पलायन करने, तनावग्रस्त होने या उदास होने की बजाए परिस्थितियों के मुताबिक रणनीति बनाकर उनका मुकाबला करें. इससे आपको बेवजह तनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा.

रुटीन फॉलो करें –

जीवन में खुशी हासिल करने और स्वस्थ रहने के लिए सबसे पहली जरूरत है अनुशासित और योजनाबद्ध दिनचर्या. सुबह सवेरे गुनगुना नींबू पानी पीना, हल्की वर्जिश करना, सैर पर निकलना, नाश्ता पौष्टिक करना, भोजन शुद्ध और सुपाच्य करना, बाजारू चीजों से बचना, शराब, सिगरेट, पान मसाला और जुए जैसे बुरी आदतों से बचना नियमित अंतराल पर चिकित्सक की सलाह से बॉडी चेकअप करवाना, दिन में दो बार अच्छी तरह दांतों की सफाई, नियमित स्नान और हाइजीन मेंटेन करना आदि आदतें आपकी दिनचर्या में शामिल हों तो आपका तन चुस्त औऱ मन मस्त रहेगा.

भले ही आप बुरे समय से गुजर रहे हों, पर किसी को खुद पर हावी न होने दें और न ही दूसरे के विचारों से अत्यधिक प्रभावित होकर अपना काम छोड़ने की गलती करें.

 

 






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