Main Menu

यादगार बन गई वह रात

छिपन-छिपन के खेल की वह रात एक यादगार बन गई-न सिर्फ मीतू के लिए बल्कि बाकी बच्चों के लिए भी. क्योंकि अब सबके माता-पिता ने इस खेल को रात में खेलने से मना कर दिया था. और सुरक्षा की दृष्टि से कालोनी में एक गार्ड भी तैनात कर दिया गया था.

‘‘यहां कैसा लग रहा है?’’ शाम को बैडमिंटन खेलते हुए सपना ने मीतू से पूछा. ‘‘बहुत अच्छा. जहां हम पहले रहते थे वह थी तो कोठी और यहां के फ्लैट से बहुत बड़ी, लेकिन वहां इतना बड़ा पार्क नहीं  था, न ही यहां की तरह वहां विभिन्न धर्मों और स्टेट्स के लोग रहते थे. वहां रहने वाले लोग ज्यादा मिलने-जुलने में विश्वास भी नहीं करते थे. सब अपनी ही दुनिया में मग्न रहते थे.’’

‘‘हां सरकारी कॉलोनी में तो हर तरह के लोग रहते हैं और चूंकि सभी नौकरीपेशा होते हैं,  इसलिए अमीर-गरीब का भेद भी नहीं होता. यहां रहने वालों के लिए मेल-मिलाप बनाए रखना तो बहुत आवश्यक होता है. यहां का कल्चर ही ऐसा है कि सब एक-दूसरे की मदद करने को तत्पर रहते हैं.’’ सपना ने उसकी बात का समर्थन करते हुए कहा. हालांकि मीतू को अपने पापा-मम्मी और छोटे भाई टिंकू के साथ इस कॉलोनी में आए सिर्फ तीन दिन ही हुए थे, फिर भी यहां न सिर्फ उसका मन लग गया था, बल्कि फ्रेंड्स भी ढेर सारे बन गए थे. यही नहीं उसने इन तीन दिनों में विभिन्न प्रांतों के व्यंजन भी चख लिए थे.

उनके पड़ोस में रहने वाले अय्यर परिवार ने आते ही अपने घर रात के खाने पर बुला लिया था और इडली,  डोसा,  सांभर सबको जी भर के खिलाया था. कल सामने रहने वाली भोजवाणी आंटी सिंधी कढ़ी बनाकर दे गई थीं और आज दोपहर नीचे रहने वाली बोस आंटी संदेश और रसगुल्ले जबर्दस्ती मम्मी को थमा गई थीं. इतने में वहां और मित्र भी एकत्र हो गए. ‘‘सपना, रात के लिए तैयार हो न? ’’ राहुल ने पूछा. ‘‘बिलकुल. मीतू को भी अपनी टोली में क्यों न शामिल कर लिया जाए.’’  ‘‘जरूर करो.’’ सबने समवेत स्वर में कहा. मीतू हैरानी से उनकी ओर देखने लगी. बैडमिंटन का खेल खत्म कर सब बच्चे पार्क के बीचों-बीच घेरा बनाकर बैठ गए.

सुमित ने मीतू की हैरानी को दूर करते हुए कहा, ‘‘हम लोग छुटिटयों में रात को छिपन-छिपाई का खेल खेलते हैं. चूंकि अभी गर्मियों की छुटिट्यां चल रही हैं, इसलिए रात को खेलने की अनुमति मिल जाती है.’’

‘‘जितने भी कॉलोनी के बच्चे हैं, चाहे छोटे हों या बड़े, सब खेलते हैं. यहां तक कि कॉलेज में पढ़ने वाले दीपू भैया व नेहा दीदी भी हमारी टोली में शामिल हैं.’’ मंजू ने और जानकारी दी.

मीतू को समझ नहीं आ रहा था कि आइस-पाइस ऐसा कौन-सा नया सा रहस्यमय खेल है जो उसके बारे में इतना बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है और सब उसे लेकर इतने उत्साहित भी हैं. सपना ने शायद उसके चेहरे पर आते-जाते भावों को पढ़ लिया था, इसलिए बोली, ‘‘हम कॉलोनी के पीछे यानी फ्लैटों के बैकसाइड में जो स्पेस है वहां भी छिपते हैं. शुरू में डर लगेगा, फिर तुम छिपने की जगहों के बारे में जान जाओगी और डर भी नहीं लगेगा. फ्लैटों की सीढिय़ों में भी छिप सकते हैं. रात होने के कारण खेल का मजा बढ़ जाता है. ’’ उसने उसे खेल के नियम समझा दिए.

रात दस बजे मिलने की बात तय कर सब घर चले गए. मीतू को दस बजने का इंतजार था. उसकी कौतुहलता बढ़ती ही जा रही थी. उसे लग रहा था जैसे वह किसी रोमांचक यात्रा पर निकल रही हो या फिर जासूसी उपन्यासों की नायिका की भांति किसी की तलाश में जा रही हो.

रात को पुगाई की गई और डैन बनी स्वाति. छिपने के समय मीतू बराबर सपना के साथ रही क्योंकि उसे तो हर जगह के बारे में पता था. रात के सन्नाटे और अंधेरे में इस तरह की भागदौड़ और फिर सांस रोककर छिपे रहने का मौका उसके लिए नया था. उसकी यही कोशिश थी कि सपना का हाथ उससे छूटे नहीं. हालांकि वह यही दिखाने का प्रयास कर रही थी कि उसे डर नहीं लग रहा है. जब भी सपना ने उससे पूछा भी कि उसे डर तो नहीं लग रहा तो उसने बड़े आत्मविश्वास से कहा, कि वह डरपोक नहीं है. लेकिन वह पकड़ी भी नहीं जाना चाहती थी, वरना फिर उसे सपना का साथ छोड़ सबको अकेले ढूंढना पड़ता. इसलिए वह डैन बनना भी नहीं चाहती थी.

किंतु सावधानी से छिपते-छिपते रहने के बावजूद वह पकड़ी गई, पर सपना उसकी जगह यह कहकर डैन देने को तैयार हो गई कि यह इसका पहला दिन है. अब मीतू स्वाति के साथ छिपने लगी, पर स्वाति खेलने में इतनी मग्न थी कि मीतू की ओर उसका ध्यान ही नहीं गया. वह जब अकेली रह गई तो भागते-भागते भोजवाणी आंटी के जीने में बने गैराज में जा छिपी. उसे यह देखकर हैरानी हुई कि वह खुला है. जबकि सपना ने उसे बताया था कि रात को गैराज में ताला लगा दिया जाता है. उसमें एक तरफ स्कूटर खड़ा था और ढेर सारा फालतु सामान, कुछ टूटे-फूटे औजार, पुराना फर्नीचर पीतल के बर्तन और कुछ संदूक भी थे. वह वहीं बैठ गई. तभी वहां एक साया देख वह चौंकी. उसने सोचा जरूर यही राजू या दीपू भैया होंगे. ‘‘आप दीपू भैया हैं क्या? ’’ जवाब न मिलने पर उसने फिर कहा, ‘‘मैं मीतू हूं, हम यहां कुछ दिन पहले ही शिफ्ट हुए हैं. तभी आप मुझे पहचान नहीं पा रहे हैं. क्या आप दीपू भैया हैं?’’

‘‘हूं, ’’ उस साये ने कहा. मीतू आश्वस्त हो बैठी रही. तभी बाहर से आवाजें आने लगीं, ‘‘सब बाहर आ जाओ, दीपू भैया आउट हो गए हैं.’’ यह सुन मीतू एकबारगी तो चकित रह गई फिर गैराज में जलती क्षीण रोशनी में उसने ध्यान से उस साये को देखा. वह एक लंबा-चौड़ा आदमी था. लंबे-लंबे बाल, मुंह पर चेचक के दाग. कपड़े भी अस्त-वयस्त व मैले थे. ‘नहीं, यह दीपू भैया नहीं हो सकते,’ उसने मन ही मन सोचा.

‘कहीं ये चोर तो नहीं है.’  यह सोचते ही उसके पैर कांपने लगे. उसने चिल्लाना चाहा पर आवाज जैसे बंद हो गई थी. वह क्या करे, अगर कहीं इसके पास कोई हथियार हुआ तो…‘‘चुपचाप बैठी रहना वरना… ’’ अचानक वह साया फुसफुसाया. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. अपनी लाचारी पर उसे रोने को दिल हो रहा था. पर इस मुसीबत का सामना तो करना ही था. आसपास नजरें दौड़ाते हुए उसके दिमाग में एक विचार कौंधा. उसने एक खाली डिब्बा उठाकर साये की तरफ जोर से फेंका. वह इस अप्रत्याक्षित प्रहार के लिए तैयार नहीं था, इसलिए घबराकर पीछे हटा तो स्कूटर से टकरा गया. इससे पहले कि वह संभलता मीतू ने एक और खाली डिब्बा उसके सिर पर दे मारा और तेजी से बाहर भागी.

‘‘मीतू तू कहां थी? मैं तुझे कब से ढूंढ रही थी.’’ परेशान सपना ने पूछा.

उसको घबराया देख सब हैरान थे. चारों ओर क्या हुआ, क्या हुआ का शोर मच गया.

‘‘अंदर… गैराज… में …चोर है… ’’ बड़ी मुश्किल से मीतू की आवाज निकली.

‘‘कहां? ’’ राहुल ने पूछा.

‘‘अंदर भोजवाणी आंटी के गैराज में.’’

‘‘तुम घबराओ नहीं, हम हैं न तुम्हारे साथ.’’ दीपू भैया ने उसके कंधे थपथपाते हुए कहा.

चोर के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था. शोर सुनकर कालोनी के लोग भी जाग गए थे. सबने जमकर उसकी पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया. भोजवाणी आंटी बार-बार मीतू को धन्यवाद दे रही थीं कि उसके कारण उनके यहां चोरी होने से बच गई. बेचारी मीतू कैसे बताती कि यह तो सिर्फ एक इत्तफाक था, उसकी बहादुरी का कमाल नहीं. खैर जो भी हो, वह सबकी प्रशंसा की पात्र बन गई और छिपन-छिपन के खेल की वह रात एक यादगार बन गई-न सिर्फ मीतू के लिए बल्कि बाकी बच्चों के लिए भी. क्योंकि अब सबके माता-पिता ने इस खेल को रात में खेलने से मना कर दिया था. और सुरक्षा की दृष्टि से कालोनी में एक गार्ड भी तैनात कर दिया गया था.

 






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *