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बायो टेक्नोलॉजी में रोजगार की संभावनाएं

बायोलॉजी के माध्यम से जो लोग मेडिकल साइंस को बतौर करियर अपनाना चाहते हैं।  उनके लिए यह क्षेत्र काफी आकर्षक और सफलता की बुलंदियों को छूने में सहायक सिद्ध हो सकता है। करियर को बायोसाइंस के क्षेत्र में संवार सकते हैं। इसकी शुरुआत 12वीं के बाद ही होती है। बारहवीं के कई छात्रों को मालूम है कि, उन्हें आगे जीवन में क्या करना है। वहीं कुछ अब भी अपने भविष्य को लेकर उलझन में होंगे। यहां हम आपको बता रहे हैं ऐसे करियर के बारे में जिसमें पैसे के साथ-साथ आगे बढऩे की अपार संभावनाएं हैं।

हमारे देश में बायोटेक इंडस्ट्री हर साल 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। भारत में हर साल इसका कारोबार करीब 11 अरब डॉलर का है। सरकार ने 2025 तक इसकी कैपेसिटी को 100 अरब डॉलर पहुंचाना तय किया है। इस वजह से इस सेक्टर में आगामी सालों में नौकरियों के सबसे ज्यादा मौके नजर आ रहे हैं। नेशनल बायो टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट स्ट्रेटजी के अनुसार अगले पांच साल में इस सेक्टर में 7 से 8 लाख नई नौकरियां मिलने का अनुमान है। यानी हर साल एक लाख से भी ज्यादा नौकरियां यहां मिल सकती हैं।

जरूरत से कम प्रोफेशनल्स

इस सेक्टर में कितना स्कोप है। इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि,  देश के 300 से ज्यादा संस्थानों से करीब 50 हजार बायोटेक प्रोफेशनल हर साल निकलते हैं, लेकिन इस इंडस्ट्री में हर साल करीब 80 हजार प्रोफेशनल्स की जरूरत है। बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री ले चुके छात्रों के लिए नौकरी के अवसर ड्रग एंड फार्मास्युटिकल, केमिकल, एनवायरनमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट, एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग और बायो प्रोसेसिंग के क्षेत्र में हैं। इसके अलावा अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों में रिसर्च साइंटिस्ट, मार्केटिंग मैनेजर, क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, एनालिस्ट, सेफ्टी स्पेशलिस्ट जैसे पदों पर उनके लिए अनेक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। इसके अलावा देश भर में 100 से ज्यादा रिसर्च लैबोरेटरी हैं। जिनमें हर साल हजारों युवाओं को नौकरी दिया जाता है ताकि वे लोग अपना भविष्य संवार सकें।

कहां से कर सकते हैं कोर्स

बायोटेक्नोलॉजी के यूजी और मास्टर कोर्स देशभर के संस्थानों में मौजूद हैं। साइंस स्ट्रीम में 10+2 कर चुके छात्र अंडर ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। बायोटेक्नोलॉजी का बीटेक कोर्स कुछ आईआईटी संस्थानों में भी उपलब्ध है। इसमें प्रवेश जेईई एडवांस के आधार पर मिलता है और हर सीट के लिए 100 से ज्यादा आवेदक होते हैं। साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी या मेडिसिन में बैचलर डिग्री ले चुके छात्र मास्टर कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एडमिशन मिलता है।

प्रमुख कोर्सेज

प्रमुख कोर्सेज में बीएससी (बायोटेक्नोलॉजी), बीई (बीटी), बीटेक (बीटी), बीएससी (जेनेटिक्स), बीएससी (माइक्रोबायोलॉजी) इत्यादि का नाम लिया जा सकता है। बाद में मास्टर्स डिग्री स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी के कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। जैसा कि पहले भी उल्लेख किया गया है कि, यह रिसर्च आधारित विषय है तो उच्च अध्ययन के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों का भी रुख किया जा सकता है। और इसके बाद नौकरी पाना कतई मुश्किल नहीं रह जाता है।

कितनी होगी सैलरी

यूजी कोर्स करने के बाद एंट्री लेने वाले छात्रों का शुरुआती पैकेज 3 से 4 लाख रुपए सालाना तक हो सकता है। एक दो साल के अनुभव के बाद यह रकम 6 लाख से ज्यादा हो सकती है। मास्टर या पीएचडी डिग्री ले चुके छात्रों के लिए नौकरी के अवसर ज्यादा होते हैं और उन्हें पैकेज भी ज्यादा मिलता है। रिसर्च संस्थानों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को शुरुआत में ही 5 लाख रुपए तक का पैकेज मिल सकता है।

देश में 800 से ज्यादा कंपनियां

देश में बायोटेक्नोलॉजी की 800 से ज्यादा कंपनियां हैं। इसके अलावा देश विदेशी संस्थाओं में भी छात्रों के लिए नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं। देश की 50 फीसदी से ज्यादा आबादी के जीवनयापन का जरिया कृषि है, लेकिन घटती पैदावार खाद्य सुरक्षा के लिए संकट है। बायोटेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र में और सुधार हो सकते हैं। बायोफार्मा से अकेले ही देश की अर्थव्यवस्था में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दे सकता है।

बढ़ेगी रोजगार की संभावनाएं

रोजगार के अवसर बढऩे की संभावनाएं भी विशेषज्ञों द्वारा इस कारण व्यक्त की जा रही है, क्योंकि तमाम पश्चिमी देशों की फार्मा कंपनियों को अपने देश के कड़े कानूनों के कारण नई विकसित दवाओं के रिसर्च ट्रायल में न सिर्फ समय और धन बल्कि अन्य परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। जबकि यही काम भारत जैसे देशों में कार्यरत कंपनियों में कांट्रेक्ट के आधार पर सुगमता से करवाया जा सकता है।






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