Main Menu

फीफा विश्व कप अंडर-17

जोश और जुनून के फुटबॉल महाकुंभ फीफा अंडर -17 में इंग्लैंड ने स्पेन को 5-2 से हरा कर पहली बार विश्व चैंपियनशिप जीत ली. इस विश्व कप में हालांकि भारत ने पहली बार मेजबानी की लेकिन देश का आत्मविश्वास देखने लायक रहा. 6 से 28 अक्टूबर तक चले फीफा अंडर-17 विश्व कप में स्पेन, माली, इंग्लैंड और ब्राजील के बीच सेमीफाइनल मैच खेले गए. फाइनल में इंग्लैंड और स्पेन के बीच खिताबी टक्कर हुई. इतिहास में यह पहला अवसर है जब दो यूरोपियन टीमें फाइनल में पहुंचीं।

2003 के बाद इंग्लैंड एक ही वर्ष में फीफा का अंडर 20 और  अंडर 17 विश्व कप जीने वाला देश बन गया. उत्तर कोरिया ने भी पिछले साल अंडर 20 और अंडर 17 महिला विश्व कप जीते थे। भारत ने पिछले दो-ढाई साल से विश्व कप आयोजन की पूरी तैयारियां कीं. सभी स्टेडियमों नई सीटें, नए ड्रेसिंग रूम, नए निकास और नए प्रशिक्षण मैदान तैयार किए गए. देश के 6 शहरों में खेले गए मैचों में जोश, जुनून और जज्बे का संगम फुटबॉल प्रेमियों में देखने को मिला. मेजबान भारत सहित 24 टीमों के बीच जम कर मुकाबले हुए. मेजबान भारत ने फीफा अंडर 17 विश्व कप में अपना पहला प्रदर्शन किया है. भारत भले ही 3 मैच हार गया पर विश्व फलक पर उस ने अपनी धाक जमा दी है. विश्व कप के आयोजन से भारत को एक नया आसमान मिल सकेगा. भारतीय खिलाडिय़ों का हौसला बढ़ा है. भारत का 6 अक्टूबर को अमेरिका, 9 अक्तूबर को कोलंबिया और 12 अक्टूबर को घाना से मुकाबला हुआ था।

भारत का पहला मैच मजबूत अमेरिकी टीम से हुआ. इस मैच में भारत 0-3 से हार गया पर भारतीय टीम ने दर्शकों का दिल जीत लिया. खिलाड़ियों के प्रदर्शन की खूब तारीफ हुई. भारत के प्रेरणादायी प्रदर्शन ने सभी को प्रभावित किया, अमेरिका से शुरुआती मैच हारने के बाद कोलंबिया के लिए चुनौतीपूर्ण प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी फिर भी भारतीय टीम ने प्रेरणादायी प्रदर्शन कर दिखा दिया कि वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों से भी दो-दो हाथ कर सकती है. भारत कोलंबिया ने 1-2 से हार गया था. इस मुकाबला भारतीय फुटबाल के इतिहास में दर्ज हो गया. भारत के एकमात्र गोलकीपर जैक्सन सिंह ने एक गोल दाग दिया. भारत ने बेहतरीन डिफेंस के दम पर कोलंबिया को पहले हाफ तक एक भी गोल नहीं करने दिया।

भारत तीसरा मैच ताकतवर घाना के साथ 4-0 से हार गया. दो बार की चैंपियन घाना मजबूत खिलाड़ियों वाली टीम थी और उस के साथ अच्छा मुकाबला रहा. भारतीय गोलकीपर धीरज मोईरांगथेम, सुरेश वांगजाम, अनिकेश जाधव, राहुल कनोली, जितेंद्र का प्रदर्शन अच्छा रहा। भारत फीफा अंडर 17 विश्व कप में स्टेडियम में पहुंचने वाले दर्शकों की संख्या में चीन के वर्षों पुराने रिकार्ड तोड़ दिया. स्पेन चौथी बार खिताबी मुकाबले में जगह बनाने में सफल रहा. इस से पहले 1991, 2003 और 2007 में फाइनल में पहुंचा था पर तीनों बार उसे उपविजेता से ही संतोष करना पड़ा।

पिछला अंडर 17 विश्व कप विजेता नाइजीरिया इस बार क्वालिफाई नहीं कर पाया. क्वालिफाई कर पाने में नाकाम नाइजीरिया 2009 में स्विट्जरलैंड के बाद पहला देश बन गया जो पिछला विश्व कप जीतने के बाद क्वालिफाई करने में असफल रहा. इस विश्व कप में इराक, ईरान, जापान, उत्तर कोरिया, घाना, गिन्नी, माली, नाइजर, कोस्टारिका, होंडुरस, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, परागुआ, न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और तुर्की ने भाग लिया। 24 टीमों को 6 समूहों में शामिल किया गया. फीफा ने आधिकारिक तौर पर दिल्ली, गुवाहाटी, गोवा, कोच्चि, कोलकाता और नवी मुंबई को विश्व कप के लिए घोषित किया गया. जहां तक ताकतवर ब्राजील की बात है, सेमिफाइनल में इंग्लैंड के हाथों हार के बाद काफी निराश हुई. ब्राजील ने 14 साल बाद खिताब हासिल करने का सपना टूटने के लिए खराब फिनिशिंग को जिम्मेदार ठहराया. वहीं इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में ब्राजील को 3-1 से शिकस्त दे कर फाइनल में प्रवेश किया।

रियान ब्रूस्टर की लगातार दूसरी हैट्रिक की बदौलत इंग्लैंड ने तीन बार के पूर्व चैंपियन ब्राजील को परास्त कर पहली बार फाइनल में प्रवेश किया. अमेरिका के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 4-1 की शानदार जीत में ब्रूस्टर ने बेहतरीन हैट्रिक जमाई थी. ब्राजील ने अंतिम बार यह खिताब 2003 में अपने नाम किया था. इस के बाद 7 सत्र से वह खिताब नहीं जीत सका. 2005 में वह उपविजेता और 2011 में चौथे स्थान पर रहा था. उधर स्पेन ने सेमिफाइनल में माली को 3-1 से हराया दिया था. स्पेन जहां कलात्मक खेल की महारथी है वहीं, माली आक्रामक टीम के तौर पर जानी जाती है. यूरो अंडर 17 चैंपियन स्पेन ‘टिकी- टाका’ यानी छोटे-छोटे पास वाली फुटबाल खेलता है जबकि अफ्रीकी चैंपियन माली आक्रामक खेल का जादूगर है।

भारतीय टीम के कप्तान अमरजीत सिंह समेत ज्यादातर खिलाड़ी बेहद साधारण गरीब परिवारों से संघर्ष के बल पर यहां तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं. अमरसिंह मणिपुर के थाउबाल जिले की हाओखा ममांग गांव के हैं और उन के पिता किसान हैं. अमरसिंह की मां गांव से 25 किलोमीटर दूर जा कर मछली बेचती हैं. वहीं फारवर्ड खिलाड़ी अनिकेत जाधव के पिता मिल में नोकरी छूटने के बाद गैराज में काम करने लगे फिर आटोरिक्शा चलाया. इसी तरह कोमल थटाल के माता-पिता दर्जी का काम करते हैं।

दरअसल फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबॉल एसोसिएशन[फीफा] अंडर 17 विश्व चैंपियनशिप सिंगापुर के लायन सिटी कप से प्रेरित है. इसे सिंगापुर की फुटबॉल एसोसिएशन द्वारा 1977 में चालू किया गया था. लायन सिटी विश्व कप पहले अंडर 16 फुटबॉल टूर्नामेंट था. फीफा के तब के जनरल सेक्रेटरी सेप ब्लैटर द्वारा 1982 ने इसकी सिफारिश की थी।

1985 में चीन में पहला टूर्नामेंट आयोजित किया गया था और तब से हर दो साल बाद इस का आयोजन किया जा रहा है. यह 16 वर्ष से कम उम्र के  खिलाड़ियों के लिए एक प्रतियोगिता के रूप में शुरू हुई थी जिस में 1978 के बाद आयु सीमा 17 वर्ष कर दी गई. 1985 से 2005 तक प्रतियोगिता में 16 टीमें थीं. 2007 से इस में 24 टीमें हो गईं। पिछला विश्व कप 2015 में चिली द्वारा आयोजित किया गया था और नाइजीरिया ने जीता था. नाइजीरिया टूर्नामेंट के  इतिहास में सबसे कामयाब देश रहा. उसने 5 खिताब जीते और 3 में उपविजेता रहा. ब्राजील दूसरे नंबर पर रहा. उस के बाद घाना और मैक्सिको ने दो-दो बार टूर्नामेंट जीते. महिला खिलाड़ियों के लिए फीफा अंडर 17 विश्व कप 2008 में शुरू किया गया. इस में उत्तर कोरिया ने उद्घाटन टूर्नामेंट जीता था।

महाद्वीपीय स्तर पर देखें तो अफ्रीका सब से कामयाब महाद्वीपीय क्षेत्र है. इसने 7 टूर्नामेंट जीते, 5 नाइजीरिया और 2 घाना ने तथा 6 बार उपविजेता रहा. उधर दक्षिण अमेरिका ने 3  टूर्नामेंट जीते और 3 बार ही रनर रहा.  यूरोप ने 4 टूर्नामेंट जीते तथा एशिया ने केवल एक टूर्नामेंट जीता है. टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को गोल्डन बॉल से सम्मानित किया जाता है. भारत के लिए यह विश्व कप यादगार रहेगा।

 






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *