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नशे की गिरफ्त में बचपन

बचपन अनमोल है, उसका कोई मोल नहीं है, लेकिन शहर में बढ़ते नशे ने बच्चों का बचपन छीन लिया है.

भारत को युवाओं का देश कहा जाता है. जिस युवा पीढ़ी के बल पर भारत विकास के पथ पर दौड़ने का दंभ भर रहा है, वह दिनोदिन नशे की गिरफ्त में है. युवा तो युवा बच्चे तक इसका शिकार बनते जा रहे हैं. नशाखोरी किसी एक राज्य की समस्या नहीं है बल्कि देश के सभी राज्य इससे जूझ रहे हैं. अगर इस बीमारी का जल्द से जल्द कोई इलाज नहीं निकला तो यह बीमारी आने वाली हर पीढ़ी को खाने के लिए तैयार होगी और इन बातों से हम सब वाकिफ हैं, हमारे चारों तरफ ये बीमारी जन्म ले रही है, कहीं किसी युवा में तो कहीं किसी मासूम से बच्चे में और ये बीमारी ना जाने और कितनी मासूम बच्चों की जान लेगी, ये बीमारी अपनी जरुरत को पूरा करने के लिए उनके मां-बाप की कुर्बानी तक मांग लेती है. इस बीमारी को आज की भाषा में ‛ड्रग्स’ कहते हैं.

 हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. एक व्यक्ति ने अपनी डॉक्यूमेंट्री के दौरान एक ‛ड्रग्स’ से पीड़ित बच्चे का वीडियो बनाया है जिसकी बातों से तो लगता है कि, आने वाली पीढ़ी बहुत खतरे में हैं. उस बच्चे का नाम कमलेश है वो सिर्फ 13 साल का है, जो भोपाल से भागकर आया है और ‛ड्रग्स’ से पीड़ित है. कमलेश पिछले 3 सालों से इस लत का शिकार बना हुआ है. उससे जब इस बारे में पूछा गया तो उसने बोला ‛मैंने इसकी शुरुआत बीड़ी, सिगरेट, ट्यूब, से की, उसके बाद धीरे-धीरे सोल्युशन लेना भी सीख गया”.

कमलेश कुछ बातों को इतने विस्तार से बता रहा था कि, जैसे यह गंद उसकी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो उसकी बातों से तो ऐसे लग रहा था कि, उसे किसी का भी डर नहीं है उसकी कई ऐसी बातों को सुनकर ऐसा लगा कि, यह जिंदगी किसी नरक से कम नही हैं, कमलेश ने कहा, ‛मैं दिन भर कुड़ा बीनता हूं और पूरे दिन में मैं 150 रुपये कमाता हूं, 20 रुपये का खाना खाता हूं, 90 रुपये का सोल्युशन पीता हूं”

कमलेश की इस लत ने तो मां-बाप को देखने का नजरिया ही बदल दिया है. उसने अपने मां-बाप के बारे में कहा, ‛मेरा मन नहीं करता मां के पास जाने का क्योंकि वो मुझे ये सब पीने नहीं देगी और जब सोल्युशन है तो मां-बाप की क्या जरुरत.” माँ से बढ़कर है ये मेरे लिए” ‛दुनिया में मेरे लिये मेरी सबसे प्यारी चीज है सोल्युशन”

कमलेश के लिए सोल्युशन ही उसकी दुनिया है वो कहता है- ‛अगर मुझे सोल्युशन पीने को नहीं मिलता है तो मैं बीमार पड़ जाता हूं.” एक बार जब मुझे सलुशन पीने को नहीं मिला तो मुझे खुन की उलटी होने लगी आठ दिन तक बीमार रहा मैंने कोई दवाई नहीं ली, अस्पताल भी नहीं गया, बस एक बार सोल्युशन पीया और एक दम ठीक हो गया. ‛मैं कुछ नहीं करना चाहता बस ऐसे ही सोल्युशन पीकर खुश हूं.”

बेघर बच्चों के बीच समस्या और गंभीर

ड्रग्स पीड़ित लोगों की संख्या करीब 5 फीसदी से भी ज्यादा है. इसमें 12 से 17 साल की उम्र के बच्चे शामिल हैं. बेघर बच्चों के बीच तो यह समस्या और भी गंभीर है. रिपोर्ट में पाया गया कि भारत के करीब दो करोड़ बेघर बच्चों में से 40-70 फीसदी किसी ना किसी तरह के ड्रग्स के संपर्क में आते हैं और इनमें से कई को तो पांच साल की उम्र से ही नशे की लत लग जाती है लेकिन यह कहना बहुत मुश्किल है कि, इसकी शुरुआत कहां से और कैसे हुई, लेकिन यह ज्यादातर पंजाब जैसे क्षेत्र में काफी तेजी से फैल रहा हैं. ड्रग्स की लत पंजाब में ही नहीं पूरे इंडिया में तेजी से फैलती जा रही है. सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाले इलाके या फिर झोपड़पट्टी जैसे स्लम जगहों में रहने वाले इस लत का शिकार तेजी से होते हैं. पहले बीड़ी, सिगरेट जैसे नशीले पदार्थ से शुरुआत होती है, क्योंकि यह सारी चीजे दुकानों पर बड़े आसानी से मिल जाती हैं. इन सबके जिम्मेदार कहीं ना कहीं बच्चों के पैरेंट्स भी होते हैं

बॉक्स….कैसे छुड़ाएं नशे की लत

इस ड्रग्स की लत को खत्म करने का कोई भी उपाय नहीं है, इस लत को खत्म तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन एक हद तक कम किया जा सकता है. जैसे जगह-जगह नशा मुक्ति केन्द्र की स्थापना कर दी जाए और सरकार नशीले पदार्थ जैसे- खैनी, दिलबाग, तम्बाकु, बीड़ी, सिगरेट जो दुकानों पर आसानी से मिल जाती है ऐसे नशीले पदार्थों की चीजों पर रोक लगा देने से इस लत पर भी रोक लग सकती हैं. अगर पैरेंट्स अपने बच्चों पर ध्यान दें व बच्चे की संगत उसके दोस्त कैसे हैं अपने बच्चे को सही गलत की पहचान करना व बच्चों से बातें करना और उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बीतना भी बच्चे को सही राह दिखा सकते हैं. ये तो सिर्फ एक कमलेश की कहानी समाने आई है, जो अपनी नरक से भरी जिंदगी से लड़ रहा है. ऐसे कितने कमलेश दुनिया के किसी कोने में अपनी जिंदगी को ड्रग्स जैसी गंदी लत के हवाले कर चुके हैं. जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हमारी आने वाली बुद्धिमान युवा पीढ़ी इस कमलेश की हालत का जी भर के सोशल मीडिया पर अपने अंदाज में मजाक उड़ा रही है. इसी युवा पीढ़ी जिससे हम सभी को बहुत सी उम्मीदें हैं. सरकार को इन सब बातों का ध्यान में रखते हुए एनजीओ खुलवाने चाहिए, ताकि इस परेशानी से जुझ रहे बच्चों को इससे छुटकारा मिल सकें. सरकार को ड्रग्स से पीड़ित युवा और किशोरावस्था के लिए कुछ अहम कदम उठाने चाहिए.

 






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