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टीनएजर और ब्रेकअप

किशोरावस्था मनुष्य के जीवन का बसंतकाल माना गया है. यह काल मानसिक शक्तियों के विकास का समय है. भावों के विकास के साथसाथ बालक की कल्पना का विकास होता है. विपरीत लिंग की ओर आकर्षण किशोरों की अवधि के दौरान आम है, किशोरावस्था जीवन के चरणों को संभाल करने के लिए बहुत मजबूत होती है और जो आसानी से प्रेम संबंधों में भावनाओं से टूट सकती है।
टिप्स गम से बचने के लिये

किशोरावस्था का प्यार

आज के दौर में किशोरावस्था में प्यार हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है, पर कई बार ऐसे रिश्तों में दिल भी जल्दी ही टूट जाया करते हैं. फिर बच्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है. कुछ यही परेशानी राधिका की भी है. वह मेरी सहेली की बेटी है. पिछले साल उसके पड़ोस में रहने
के लिए एक परिवार आया था. उनका 15 वर्ष का एक बेटा था. वो और राधिका जल्द ही पक्के दोस्त बन गए पर ….जितनी जल्दी दोस्ती हुई उतनी ही तेजी से ब्रेकअप. राधिका ब्रेकअप हो जाने के कारण चिढ़चिढ़ी व गुमसुम सी रहने लगी है. इस वजह से पूरा परिवार परेशान है. आइये जानते हैं कि ऐसे हालातों से कैसे निपटें।

बात करें

आपके बच्चे की पढ़ाई की बात हो या दिल की आप उससे हर बारे में पहले अच्छे से जान लें. उसको क्या परेशानी है, इस बात को जानने के बाद ही आप उसको संभाल सकते हैं. बच्चों को प्यार और आकर्षण का अंतर भी समझायें. हो सकता है आपका बच्चा मन में ही सारी बातों को रखे हो इसलिए वो ज्यादा परेशान हो, उससे खुलकर बात करें. उसे समझायें।

पढ़ाई के महत्व को समझायें

किशोरावस्था के प्यार के चलते अक्सर पढ़ाई प्रभावित हो जाती है. बच्चे को पढ़ाई का महत्व प्यार से समझायें. उसे समझायें कि ये उम्र पढ़ाई करने के लिए कितनी जरूरी है. ये पढ़ाई उसके करियर की नींव होती है. इस समय पढ़ाई के प्रति लापरवाही उसके भविष्य को खराब कर सकती है. जरूरत हो तो काउंसलर के पास ले जाए. राधिका के केस में भी यही हुआ. जब उसके माता-पिता को वास्तविक कारण पता चला तो वह क्रोधित होकर उस पर चिल्लाए नहीं, बल्कि उसे समझाया और फिर से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की।

दोस्तों से बात करें

अगर आपको लग रहा कि आपका बच्चा दोस्तों के साथ ज्यादा कंफर्टेबल है ,तो उसके दोस्तों को घर बुलायें. उन्हें बात करने का मौका दें. ताकि वो अपने मन की बात को कह सकें. साथ ही उनकी आपस की मस्ती भी उसे पुरानी बातों को भुलाने में मदद करेंगी.
अक्सर देखा गया है कि बच्चे मातापिता से कुछ बताते हुए हिचकते हैं. पर करीबी मित्र को सब बता देते हैं. ऐसे तनाव से बचाया जा सकता है।

हॉबी को बढ़ावा दें

गाने सुनना, गाना या लिखने से लेकर पेंटिंग तक जो भी आपके बच्चे की हॉबी हो उसे करने के लिए प्रेरित करें. इससे उसका मन बहलेगा. पर ध्यान रखें कि अपनी हॉबी को करते समय उसका मन कैसा रहता है. उसको घुमाने भी ले जा सकते हैं।






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