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कॉलेज लाइफ जीवन का स्वर्णिम काल

जब कोई युवक या युवती स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद पहली बार कॉलेज में एडमिशन लेता है, तो उसके मन में एक अलग ही उत्साह और उमंग होती है। वह अपने आपको कॉलेज स्टूडेंट के रूप में देखकर फूला नहीं समाता यहीं से शुरू होती है। उसके व्यक्तित्व विकास की कहानी जो कि अनवरत चलती रहती है।

आज का युवा महत्वाकांक्षी है। उसने अपने भविष्य को लेकर सपने संजोए होते हैं। इन सपनों को साकार करने हेतु वह उच्च शिक्षा प्राप्त करता है, ताकि उसका व्यक्तित्व विकास हो और वह अपनी मंजिल को पा सके। स्कूली शिक्षा जहां व्यक्ति को शिक्षित करती है, वहां उच्च शिक्षा उसका सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। युवाओं के व्यक्तित्व विकास के अनेक पहलू हैं। जिन्हें मिलाकर उनका सर्वांगीण विकास होता है। उच्च शिक्षा से जुड़े सभी सरकारी और निजी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत युवाओं के व्यक्तित्व विकास हेतु अनेक योजनाएं, कार्यक्रम, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण की सुविधा है, ताकि उनका करियर बन सके।

कॉलेज द्वारा हर वर्ष युवा उत्सव का आयोजन होता है। यह स्थानीय महाविद्यालय स्तर से शुरू होकर जिला, संभाग, विश्वविद्यालय और फिर राज्य स्तर पर आयोजित होता है। विजेता को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय युवा उत्सव में शामिल होने का अवसर मिलता है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। युवा उत्सव की अनेक विधाएं हैं जिसमें वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, प्रश्न मंच से लेकर खेलकूद तक की विधाएं शामिल होती हैं।

प्रत्येक युवा को शारीरिक गतिविधियों से जोडऩे हेतु एनसीसी, एनएसएस या खेलकूद गतिविधियों में से किसी एक से जुड़ना होता है। इससे उनका न केवल शारीरिक विकास होता है। अपितु उनमें देशभक्ति, समाज और मानवता के प्रति भावना जागृत होती है।

एनसीसी, भारतीय सेना की दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में कार्य करती है। इसके कैडेट्स अनुशासित होते हैं। तथा उन्हें आवश्यक सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। एनसीसी कैडेट्स का व्यक्तित्व सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि आगे चलकर वे सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करते हैं। इसमें लड़कियां भी शामिल होती हैं।

प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में एनएसएस यानी राष्ट्रीय सेवा योजना का गठन किया जाता है। इसके कार्यकर्ता समाज की सेवा का दायित्व अपने कंधों पर लेते हैं। शिविरों का आयोजन कर ग्रामों की सफाई, सड़क निर्माण, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य के प्रति जनचेतना, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के प्रति जागृत किया जाता है। इन सबके अलावा शिविरों में रोजाना बौद्धिक कार्यक्रम भी होते हैं। इससे युवाओं का बौद्धिक विकास भी होता है। प्रत्येक महाविद्यालय में प्रतिभा बैंक का गठन किया गया है। जिसमें विभिन्न क्षेत्र के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ आकर युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, ताकि उनका व्यक्तित्व विकास हो सके।

उच्च शिक्षा द्वारा संचालित योजनाओं में से एक है। करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ यह भी प्रत्येक कॉलेज में होता है। जिसके तहत न केवल करियर मेला लगता है। अपितु विभिन्न कंपनियां कैम्पस सिलेक्शन भी करती है। इस प्रकोष्ठ द्वारा युवाओं को रोजगार संबंधी मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि युवा अपनी शैक्षणिक योग्यता और अभिरूचि के अनुसार करियर का चुनाव कर सके।

उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवा राजनीति का पहला पाठ भी अपने शिक्षण संस्थाओं में ही सीखते हैं। अब तो छात्रसंघ के चुनाव भी होने लगे हैं। युवा अपने मताधिकार के प्रति जागरूक होंगे। भविष्य के राजनेता इन्हीं कॉलेज और यूनिवर्सिटियों से ही तैयार होंगे। यह भी उनके व्यक्तित्व का विकास है। कुछ लोगों का राजनीति ही पेशा है।

देश को अच्छे खिलाडिय़ों की भी आवश्यकता है। उच्च शिक्षा युवाओं को उनके पसंदीदा खेल खेलने और उसमें आगे बढऩे या करियर बनाने हेतु मार्ग प्रशस्त करती है। इनडोर और आउटडोर गेम्स में उनकी सहभागिता उनके व्यक्तित्व को निखारती है। आगे चलकर ये युवा खेल जगत में भारत का नाम रोशन करेंगे। जब कोई युवा कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ता है तो वहां उसे व्यक्तित्व विकास के कई अवसर मिलते हैं, इसीलिए कॉलेज लाइफ को जीवन का स्वर्णिम काल कहा जाता है, जो दोबारा नहीं मिलता। इसलिए कोई भी अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहिए।

कॉलेज में लडक़े और लड़कियां दोनों पढ़ते है।  वहां दोनों को ही एक-दूसरे लिंग के प्रति निडरता होती है।  उनके भीतर खासतौर पर लड़कियों में लडक़ों का भय नहीं होता और वे उनसे दोस्ती कर न केवल मुखर होती है। अपितु उनका आत्मविश्वास भी जागृत होता है। आगे चलकर लड़कियां जब जॉब में जाती हैं तो वहां पुरूषों के साथ काम करने में उन्हें शर्म झिझक नहीं होती.

आमतौर पर लोग अच्छे श्रोता तो होते हैं। पर अच्छे वक्ता नहीं. इसी प्रकार लोग अच्छे पाठक तो होते हैं, लेकिन अच्छे लेखक नहीं इसका सबसे बड़ा कारण उन्हें इसके लिए समुचित मंच और उपयुक्त माहौल नहीं मिलता। उच्च शिक्षा से जुड़े युवाओं को यह मंच प्रदान किया जाता है कि, आप अपनी वाक कला या भाषण कला को उजागर कर सकें अथवा अच्छे निबंधकार या लेखक बन सकें।

कॉलेजों में युवाओं के व्यक्तित्व विकास हेतु शोध पत्रिकाएं, संदर्भ ग्रंथ, समाचार पत्र पत्रिकाएं तथा करियर से जुड़ी पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाती है। इससे उनका ज्ञान बढ़ता है। उनकी साहित्य के प्रति रूचि जागृत होती है। उच्च शिक्षा हमें सांस्कृतिक आधार पर भी व्यक्तित्व का विकास करती है।  एक राज्य या प्रदेश के युवा अन्य राज्यों के सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाते हैं, तो वहां की संस्कृति से परिचित होते हैं तथा अपनी संस्कृति से उन्हें परिचित कराते हैं। इससे दोनों का ही व्यक्तित्व विकास होता है। सभी कॉलेजों में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसमें गायन, वादन और अन्य गतिविधियां होती हैं। अच्छे गायक और वादक इसी मंच से तैयार होते हैं, जो टीवी के रियलिटी शो में अपनी प्रतिभा का डंका बजाते हैं।

बिन गुरू के ज्ञान नहीं मिलता. माता-पिता संतान को जन्म देते हैं, लेकिन उनमें अच्छे संस्कार डालना और उनके व्यक्तित्व का बहिर्मुखी विकास करने का दायित्व शिक्षकों पर होता है। उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले प्रोफेसर स्वयं अपने आपमें ऊंची डिग्रीधारी और विद्वान होते हैं। उनके मार्गदर्शन में अध्ययन करना निश्चित ही व्यक्तित्व को उभारता है। प्रोफेसर अपने प्रत्येक विद्यार्थी की ताकत और कमजोरी दोनों को जानते हैं। उन्हें सलाह देकर उनकी कमजोरी को ताकत के रूप में बदल देते हैं। ऐसा उनके व्यक्तित्व विकास के लिए बहुत जरूरी है। अन्यथा कॉलेज से निकलने वाले युवा के पास डिग्री तो होगी पर काबिलियत नहीं यदि स्टूडेंट अपने टीचर को अपना आदर्श माने और उनके बताए मार्ग पर चले तो उनका व्यक्तित्व इतना विशाल होगा कि सभी को उन पर गर्व हो सकेगा।






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