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कैसे चुनें मनपसंद कोर्स और करियर

करियर का चुनाव हम अपने पसंद से नहीं बल्कि हालात के आधार पर ही करते हैं, तभी तो अधिकांश छात्र-छात्राएं स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद चाहे-अनचाहे कॉलेजों में ही दाखिला लेते हैं. आगे पढ़ाई जारी रखने की इच्छाशक्ति भले ही नहीं हों, लेकिन पारिवारिक दबाव के चलते उन्हें अपनी दिलचस्पी को ताक पर रखकर बगैर सोचे बीए में अपना नाम दर्ज कराना पड़ता है।

मैंने 12वीं की परीक्षा उतीर्ण की है और अभी ग्रेजुएशन में एडमिशन लेकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही हूं. मेरी मां एक कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और पापा शहर के मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. वैसे तो मुझे गणित से काफी डर लगता है लेकिन फिजिक्स मेरी पसंदीदा विषय है. मैं विदेशी भाषा के रुप में स्पेनिश, फ्रेंच और जर्मन भी सीखना चाहती हूं. अंग्रेजी मुझे बचपन से ही अच्छा लगता है।

मेरी समस्या यह है कि मैं यह निर्णय नहीं कर पा रही हूं कि किस फील्ड में अपने करियर की शुरुआत करुं. साथ ही अपने उच्च शिक्षा के लिए किस स्ट्रीम का चयन करना चाहिए. विषय के चयन के बारे में भी मुझे काफी डाइलेमा है. वैसे मुझे टीचिंग प्रोफेशन भी बहुत अच्छा लगता है. सोच नहीं पा रहीं हूं कि आखिर मुझे अपने करियर के लिए क्या करना चाहिए. प्लीज आप मुझे कोई रास्ता दिखाएं. मैं यह पत्र आपको बड़ी उम्मीद से लिख रही हूं. -निलोफर (12वीं की एक छात्रा) ऊपर के पत्र में निलोफर की परेशानी महज एक लड़की की परेशानी नहीं है. यह निलोफर जैसी 12वीं की परीक्षा दे चुके लाखों छात्रों के उलझन का कारण होता है. 12वीं की परीक्षा देने के तुरंत बाद छात्रों के सामने करियर चुनाव की समस्या खड़ी हो जाती है. यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब निर्णय के लिये समय काफी कम बचा रह जाता है. सबसे अधिक समस्या छात्रों को कॉलेज के चयन को लेकर होती है. फिर कोर्स के चयन की समस्या भी कम गंभीर नहीं होती है. फिर यदि कोर्स तय हो जाता है तो दूसरी समस्या विषय चयन को लेकर होता है. आईए देखते हैं कि 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए कोर्स, कॉलेज और करियर का चुनाव कैसे करें-

करियर कैसे प्लान करें?

पहले यह जानें कि करियर नौकरी से अलग कैसे होता है? जब भी हम करियर की बातें करते हैं तो इससे मिलते-जुलते शब्द नौकरी को हम करियर मान लेने की भूल करते हैं, जबकि नौकरी और करियर में काफी बड़ा अंतर होता है. नौकरी का क्षेत्र प्रमोशन, वर्कर्स, प्रिविलेज और पोजीशन से होता है जबकि करियर का क्षेत्र इन सब पैरामीटर से काफी अलग होता है, इसका कैनवस काफी बड़ा होता है, इसका डोमेन भी व्यापक होता है और नौकरी उसका केवल एक पार्ट होता है.

खुद से प्रश्न पूछें

ऐसा कहा जाता है कि प्रश्न पूछना एक कला है और उचित करियर व कोर्स के चयन में यह अनिवार्य होता है. कोर्स, कॉलेज और करियर के चयन से पूर्व एक छात्र को खुद से निम्नांकित प्रश्न पूछने चाहिए-

आप अपने जॉब से कितनी सैलरी पैकेज की उम्मीद करते हैं?

क्या आप जॉब सुरक्षा भी चाहते हैं?

जॉब सुरक्षा के बारे में आपकी खुद की अवधारणा क्या है?

भविष्य में आप अपने जॉब्स से किस प्रकार के विकास की उम्मीद करते हैं?

आपके विदेशों में जॉब के अवसर और विदेश भ्रमण के बारे में क्या विचार हैं?

आने वाले वर्षों में आप अपने भावी नियोक्ता से किस तरह की अपेक्षा करते हैं? आप कितने महत्वाकांक्षी हैं? आप अपने भविष्य और परिवार के बारे में क्या सपना देखते हैं? आने वाले दस वर्षों में आप खुद को कहां पर देखना चाहते हैं?

विभिन्न विकल्पों को सर्च करें

जब आपने यह निर्णय ले लिया कि आप कौन से करियर के डोमेन में जाना चाहते हैं तो उसके बाद मुख्य काम यह निर्णय लेना बच जाता है कि उस करियर के डोमेन में जॉब्स के विभिन्न विकल्प क्या हैं. उदाहरण के लिए शिक्षा में करियर बनाने के निर्णय के साथ आपको इस विषय पर भी गंभीरतापूर्वक विचार कर लेना चाहिए कि आप किस तरह के जॉब्स का चुनाव कर रहे हैं. टीचिंग का जॉब स्कूल या कॉलेज में? मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेज में? लॉ स्कूल या मैनेजमेंट स्कूल में? पब्लिक या निजी क्षेत्र में?

नियोक्ता के उम्मीदों को भी ध्यान में रखें

करियर का निर्णय केवल वनवे ट्रैफिक नहीं होता है. यदि आप कैंडिडेट के रुप में केवल अपने ही अपेक्षा को ध्यान में रखते हैं तो यह सही करियर निर्णय है. आपको अपने नियोक्ता की उम्मीदों को भी ध्यान में रखना पड़ेगा. वैश्वीकरण के कारण समय काफी बदल गया है. आज जॉब करना काफी कठिन हो गया है. आज के दौर में नियोक्ता के बुनियादी आदर्श और सिद्धांत में बदलाव आया है. एक नियोक्ता अब कहते हैं-परफॉर्म और पेरिश (काम करो या नष्ट हो जाओ), ग्रो और गो टू हेल (आगे बढ़ो या नरक में जाओ), एक्सेल और गेट एक्सड (सर्वोत्तम करो या नौकरी से हटा दिये जाओगे). नौकरी में बने रहने के लिए अपने होने वाले बॉस के उम्मीदों को साकार करने के लिए अपनी काबिलियत के बारे में भी जरुर सोचना चाहिए क्योंकि बॉस इज ऑलवेज राईट….वह कभी गलत नहीं हो सकता।

अपने मनपसंद कोर्स का ही चयन करें

जब कोर्स चयन का प्रश्न उठता है तो छात्र इस संबंध में कई बातों से प्रभावित होकर निर्णय लेते हैं. मातापिता के अतिरिक्त उन पर दोस्तों और बाहरी दुनिया का भी काफी प्रभाव पड़ता है. जबकि कड़वी सच्चाई यही है कि करियर के ग्रोथ के लिए उसी कोर्स का चयन किया जाना चाहिए जो छात्रों के अपने पसंद की हो. ऐसी स्थिति में छात्र कम मेहनत से भी अपने करियर और जॉब में अच्छा कर लेते हैं।

इसके बारे में कोर्स विशेषज्ञ और करियर काउंसलर का यह मानना है कि कोर्स का चयन हमेशा ही कॉलेज के चयन से अधिक महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यदि हम एक ऐसे कोर्स में अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं जिसमें हमारी रुचि होती है तो हम इस कोर्स में एक अच्छे कॉलेज के आभाव के बावजूद भी बेहतर कर लेते हैं।

सारांश यही है कि 12वीं के बाद कॉलेज, कोर्स और करियर के चयन का कार्य तलवार की धार पर चलने जैसा होता है. इसमें थोड़ीसी गड़बड़ी से परिस्थितियां काफी बदल जाती है जो जीवन की दिशा और दशा को काफी अहम रुप में प्रभावित कर सकती है. इसलिए किसी भी निर्णय पर पहुंचने के लिए जल्दीबाजी में कोई निर्णय नहीं करनी चाहिए. हर एक फैसले को कई पैरामीटर्स पर तौलकर परख लेनी चाहिए तब अंतिम रुप से जो आपके भविष्य और करियर के चयन को लेकर ठीक लगे उसपर आगे बढ़ना चाहिए।






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