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इंटर्नशिप के रास्ते नौकरी की मंजिल

किसी भी क्षेत्र में करियर बनाने की सबसे पहली सीढ़ी होती है इंटर्नशिप. इससे आपको अपने क्षेत्र में व्यवहारिक ज्ञान मिलता है. ऐसे में कई स्मार्ट तरीके अपनाने होते हैं ताकि इंटर्नशिप जल्द से जल्द जॉब में बदल जाए.

   किसी उम्मीदवार के लिए इंटर्नशिप अनुभव अर्जित करने, नये संपर्क बनाने और नियोक्ता के समक्ष अपनी उपयोगिता साबित करने का अच्छा अवसर होता है. इसके जरिए वे संस्थान में पूर्णकालिक नौकरी हासिल करने में भी कामयाब हो सकता है. एक इंटर्नशिप के लिए बेहतर रणनीति यह है कि वह कार्यस्थल पर सबको सुने, सीखे और अपना विकास करे. इंटर्नशिप एक ऐसा अवसर है जो फ्रेशर्स के लिए आकर्षक करियर की राह को सुगम बनाता है. कई बार इंटर्नशिप पर आने वाले छात्रों की अच्छी परफॉरमेंस देख कर स्थायी नौकरी पर रख लिया जाता है. हालांकि इंटर्नशिप का सिद्धांत यानी कम पैसों में आधारभूत कार्यानुभव हासिल करना, पश्चिमी देशों में अधिक लोकप्रिय है पर पिछले कुछ समय में भारत में भी यह प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है.

सोशल स्किल की जरूरत

कॉलेज लाइफ और नौकरीपेशा जीवन में बहुत अंतर होता है. कॉलेज स्टूडेंट जब नौकरी करना शुरु करते हैं, तो उनमें बहुत सी चीजों की आवश्यकता होती है. सबसे पहले जिस चीज की जरूरत होती है वह  है सोशल स्किल.   सोशल स्किल ही आपको वर्कप्लेस पर कमयाब बनाती है. इंटर्नशिप के दौरान स्टूडेंट बाकी सहकर्मियों के साथ काम करते हुए, इसे डेवलप करते हैं. जो उन्हें आगे बहुत काम आता है. इंटर्नशिप के दौरान वह सीख जाते हैं कि, आखिर ऑफिस के माहौल में खुद को किस तरह एडजस्ट करना है. एक इंटर्न के लिए अच्छी सोशल स्किल काफी काम आती है. ऑफिस सहकर्मी के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना ,दूसरे लोगों को ऑब्जर्व करना ,ऑफिस में लोग एक दूसरे से कैसे बात करते हैं, जैसी बातें सीखने को मिलती हैं.

 

व्यवहारिक ज्ञान बढ़ेगा

इंटर्नशिप से काफी कुछ सीखने को मिलता है. इसके जरिए आपको प्रेक्टिकल नॉलेज मिलती है. ऑफिस में फोन पर किसी से बात कैसे करनी है. पर्सनल फोन आने पर किस तरह हैंडल करना है. कस्टमर से कैसे डील करना है. ऑफिशियल मेल कैसे भेजना है. जैसे प्रैक्टिकल जानकारी इंटर्नशिप के दौरान मिलती है.

 

समय पर ऑफिस पहुंचे

कॉलेज और इंस्टिट्यूट में टाइम की कोई पाबंदी नहीं होती. एक लेक्चर छूट गया तो, दूसरा अटेंड करा जा सकता है या दोस्तों से उसके बारे में भी पूछा जा सकता है. लेकिन नौकरी में ऐसा नहीं होता. समय पर पहुंचना बहुत जरूरी होता है. नहीं तो सैलरी कटने के साथ ही, इससे ऑफिस में इमेज भी खराब होती है. इंटर्नशिप के दौरान आप ऑफिस में सबसे जूनियर होते हैं. हर दिन आपको समय से पहले आना होता है. सीनियर्स काडर आपको समय का पाबंद बना देता है. यही आदत आपको लाइफ में आगे बढ़ने में मदद करती है.

 

समय से काम को पूरा करें

इंटर्नशिप के दौरान हर दिन सीनियर्स द्वारा मिलने वाले काम को उसी दिन पूरा करना, वह भी प्रशिक्षण के साथ. यह आदत कॉलेज के दिनों में नहीं होती. नौकरी शुरू करने से पहले, इंटर्नशिप से आप, किसी भी काम को समय पर पूरा करने की आदत सीख जाते हैं.

 

 

 

कम्युनिकेशन स्किल बढ़ेगी

नौकरी से पहले इंटर्नशिप करने से बातचीत करने का तरीका भी जाता है. किससे किस तरह बात करनी है. कितनी बात करनी है. किस तरह के शब्दों का प्रयोग करना हैआगे चलकर यह नौकरी में फायदा पहुंचाते हैं.

 

 

स्थायी कर्मियों की तरह काम करें

खुद को इंटर्न मान कर काम के प्रति लापरवाह न बनें. सौंपे गये कार्य को पूर्णकालिक स्टाफ की तरह पूरा करने का प्रयास करें. काम के प्रति अपनी जिज्ञासा दिखाएं. सुबह जल्दी आएं और जरूरत हो तो देर तक काम करें. जिस पद पर काम कर रहे हैं उससे एक कदम ऊपर के पद के अनुसार कपड़े पहनें. पूरे आत्मविश्वास के साथ काम करें. सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े और हर काम में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने का प्रयास करें.

 

कंपनी पर अपनी पकड़ बनाएं

संस्थान की जरूरत को समझने का प्रयास करें और आप किस तरह उस जरूरत को पूरा कर सकते हैं, इस संबंध में विचार करें. प्रत्येक प्रोडक्ट और सेवा को समझें. कंपनी के ग्राहकों और उपभोक्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार करें. इससे उपभोक्ता के स्वभाव को समझने में मदद मिलेगी. साथ ही आपका उपभोक्ता को अच्छी सेवा देने वरिष्ठों की नजर से सकारात्मक असर पड़ेगा. इतना ही नहीं, इससे आप अपने लिए उस इंडस्ट्री में आगे बढ़ने का रास्ता समझ सकेंगे.

बॉक्स…. अपनी सोच को विस्तार दें

आपकी सोच से हर संभावित प्रश्न और जरूरत का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता झलकनी चाहिए. अन्य इंटर्न उम्मीदवारों में खुद को अलग करने के लिए आपसे अपेक्षा किए जाने वाले कार्य से अधिक काम करें. खुद को किसी अतिरिक्त प्रोजेक्ट में वालेंटियर के तौर पर प्रस्तुत करने से पीछे न हटें. अपनी समय सीमा को लेकर भी लचीला रूख अपनाएं. जरूरत के समय आपका जल्दी आना और देर से जाना टीम सदस्यों के बीच अच्छी छवि बनाने में मदद करेगा. सौंपे गये कार्य के अलावा किसी अतिरिक्त काम को भी मन लगाकर करना, लचीला रूख और काम के संबंध में एकाग्रता से सोचना अपनी भूमिका के प्रति आपके समर्पण को दर्शाता है. इससे आपके सहकर्मी और वरिष्ठ सदस्य आपको उस टीम का हिस्सा मानने लगते हैं.

 

 

 






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