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अविस्मरणीय क्षण

वह कई  वर्षों से हमारे घर में हमारे साथ ही रहता था। वह कभी कुछ बोलता भी नहीं था पर हर समय चुपचाप मुझे देखता रहता था मानो कुछ कहना चाहता हो। उसकी बड़ी-बड़ी काली आंखों में जो प्यार था, संभवत: मुझे कभी दिखा भी नहीं था। उसका रंग बिलकुल काला था, पर उसका दिल प्रेम से ओत-प्रोत था। उसके इस नि:स्वार्थ प्रेम के बावजूद भी मैं उसे कभी दिल से अपना नहीं पायी थी क्योंकि मैं शुरु से ही उसे अपने घर में शरण नहीं देना चाहती थी। एक तो घर छोटा, ऊपर से उसका खाना बनाने का काम भी मेरे जिम्मे पर गया था। कपड़े आदि धोना तो अलग काम था ही, पर एक दिन ऐसी घटना घटी जिसे मैं कभी भुला नहीं पाऊंगी।

    उस दिन मैं और मेरे पति सोफा पर बैठे हुए थे। वो भी वहां आकर चुपचाप जमीन पर बैठ गया था। एक कोने में बैठा-बैठा वह हमें देख रहा था। मैंने उसे कहा भी, “यहां से जाओ बाबा हमें कुछ देर तो अकेला छोड़ दो”। पर उसके कानों पर जूं नहीं रेंगी। बाहर तो क्या जाना था, वह वहीं लेट गया, शायद थक गया था।

   मैंने भी पति से खीज कर कहा, “इसे कहां से उठा लाये हो? किसी काम का नहीं है। कोई घर में घुस भी जाये तो भी यह कुछ नहीं कहेगा।” पति ने कहा, “ऐसी बात नहीं है, अभी ट्राई कर लेते हैं, मैं तुम्हें मारने का नाटक करता हूं फिर देखते हैं, ये क्या करता है?”

  ऐसा कह कर पतिदेव ने मुझे मारने की एक्टिंग शुरु की और मैं भी ऐसे करने लगी जैसे अपने को बचा रही हूं। एक मिनट तो वह हमें देखता रहाफिर एकदम जमीन से उछल कर उसने पतिदेव के दाहिने हाथ की कलाई पकड़ ली। पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह अपना हाथ छुड़ा नहीं पा रहे थे। घबराकर उन्होंने कहना शुरु किया, “अरे मैं मजाक कर रहा था भाई, मैं इसको कुछ नहीं कर रहा हूं। मार तो बिलकुल ही नहीं रहा हूं।” पर उसकी अकल में कुछ नहीं आ रहा था। आखिरकार मैंने हंसना शुरु कर दिया, “अरे पीटर, ओ पीटर कुछ नहीं हुआ, छोड़ दे हाथ। ” कुछ क्षण उसने मुझे देखा, फिर पति को और फिर दुबारा मुझे। अंत में आश्वस्त होकर उसने उनकी कलाई अपनी मजबूत पकड़ से छोड़ दी और पतिदेव अपने बाएं हाथ से अपनी दाहिनी कलाई पकड़ कर बैठ गये।

  पीटर लैब्राडोर नस्ल का शिकारी कुत्ता था। जबड़े की मजबूत पकड़ के बावजूद, पतिदेव की कलाई पर एक खरोंच भी नहीं आयी थी। हां, कुछ दिन तक कलाई पर आयोडेक्स की मालिश अवश्य करनी पड़ी थी। पीटर कभी का हमारी जिन्दगी से चला गया पर उन क्षणों की याद आज भी ताजा है।






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